कोरोना आतंक के कारण मृत पिता दाह संस्कार के लिए घंटो भटके, खड़गपुर अनुमंडल के पिंग्ला की है घटना


                        
                          रघुनाथ प्रसाद साहू
खड़गपुर। बेटे के शव का अंतिम संस्कार करने में लोगों के विरोध के चलते परिजनों को घंटो भटकना पड़ा जबकि प्रशासन को भी मशक्त करनी पड़ा। घटना पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पिंगला थाना के नाड़ाखा  गांव की है जहां गांव वालों ने कोरोना से मौत होने के संदेह में राजू जाना नामक युवक के शव का गांव के श्मशान में अंतिम संस्कार होने नही दिया। जबकि राजू के पिता के पास बेटे का कोरोना निगेटिव का सर्टिफिकेट मौजूद था। बाद में लाचार होकर वे शव को मेदिनीपुर शहर ले गए लेकिन स्थानीय लोगों ने वहां भी विरोध किया। प्रशासन के समझाने के बाद भी लोग नहीं माने जिसके बाद शव को दोबारा गांव में लाया गया। फिर परिजनों ने सर्टिफिकेट के साथ गांव में ही शव को जलाने की अनुमति लेने के लिए प्रदर्शन पर बैठ गए। घंटो बाद पुलिस व प्रशासन के समझाने पर गांव वाले अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए फिर राजू के शव का दाह संस्कार किया गया। दरअसल राजू मुंबई में रहकर काम करता था व श्रमिक स्पेशल ट्रेन से घर वापस आने के लिए रजिस्ट्रेशन करा रखा था व उसने घर पर भी यह बात बताई थी। लेकिन ट्रेन पकड़ने के पहले ही उसकी तबियत खराब हो गई व उसे नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई। बाद में शव का अंत्यपरीक्षण होने पर उसमे निमोनिया के लक्षण पाए गए जबकि कोरोना टेस्ट निगेटिव था जिसका सर्टिफिकेट भी दिया किया गया था। पिता बेटे के शव को बड़ी मुश्किल से किसी तरह एंबुलेंस की मदद से गांव लाया गया था लेकिन दाह संस्कार में आई बाधा से पिता को बेटे कि मौत पर आंसू बहाने का भी समय नही मिला। इससे पहले लाकडाउन लगे प्रथम सप्ताह में भी इस तरह की घटना मिली थी जब बंगलोर मे  मृत हृदय रोगी महिला की शव को  गांव मे जलाने नहीं देने पर बाध्य होकर जंगल में दफनाना पड़ा था उक्त घटना  खड़गपुर  नम्बर एक प्रखंड के हरियातारा अंचल  के पोड़ाडिहा गांव में घटी थी उस वक्त भी गांव में विरोध होने पर मेदिनीपुर शहर ले जाया गया था ताकि विद्युत शवदाह गृह में जलाया जा सके पर स्थानीय लोगों के विरोध के चलते दोबारा गांव से दूर झाड़ेशावर महतो की पत्नी मीरा महतो को जंगल मे दफना दिया गया था।

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