सड़कें यूं उदास तो न थी ....!

डगर - डगर कोरोना कहर पर खांटी  खड़गपुरिया की चंद लाइनें ....
सड़कें यूं  उदास तो न थी ....!!
तारकेश कुमार ओझा
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अपनों से मिलने की ऐसी तड़प ,  विकट प्यास तो न थी
शहर की  सड़कें पहले कभी यूं उदास तो न थी 
पीपल की छांव तो हैं अब भी मगर
बरगद की  जटाएंं यूं  निराश तो न थी 
गलियों में  होती थी समस्याओं की  शिकायत
मनहूसियत की महफिल यूं बिंदास तो न थी
मुलाकातों में  सुनते थे ताने -  उलाहने
मगर जानलेवा खामोशियों की यह बिसात तो न थी .
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लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ट पत्रकार हैं। संपर्कः 9434453934, 9635221463

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