बाबू शब्द एक रुप अनेक, बाबू सम्मानसूचक शब्द या गुलामी की निशानी!



‘बाबू’ इस शब्द का हमारे देश में बहुतायत में प्रयोग होता है बाबू का प्रयोग जहां अधिकारियों व रसूखदार लोगों के लिए होता है वहीं कई लोग पिताजी को बाबूजी कहते हैं कुछ लोग अपने से छोटे व बच्चों को प्यार से बाबू कहते हैं। आखिर भारत में बाबू शब्द से इतना लगाव कब और क्यों हुआ कि  नौकरशाहों के नाम के साथ बाबू शब्द धड़ल्ले से लगने लगे। पता चला ये शब्द अंग्रेज के जमाने में हम पर कटाक्ष के रूप मे उपयोग किया जाता था जिसे हमने गर्व के साथ अपना लिया है आज भी इसका इस्तेमाल हम शान के रूप मे करते है।दरअसल अंग्रेज जब भारत आए तो उनको यहाँ पर उनको भारतीयों के भूरे रंग को देखकर हंसी आती थी तो वे लोग हम भारतीयों को बम्बूआ कहकर मजाक उड़ाते थे।
दरअसल ब्रिटेन के जंगलों मे एक बन्दर की प्रजाति पाई जाती थी जिसे बम्बूआ कहा जाता था जिसका रंग भूरा होता था और वो हम भारतीयों की तुलना बम्बूआ के साथ करते थे जो बाद में आम बोलचाल की भाषा में बाबू उच्चारित होने लगे। गौर करने वाली बात है कि आजाद भारत में गुलामी के इस प्रतीक शब्द को आज तक शान से अपनाया गया है। कहने को तो भारत को आजाद हुए 74 वर्ष हो गए परन्तु इस बाबू शब्द व बाबूशाही से निजाद नहीं मिली। हमारे प्राचीन मान्यवर या महोदय जैसे शब्द का विलुप्त होना व उसके जगह पर बाबू का प्रयोग दुखद है।
मनोज कुमार साह, खड़गपुर
डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार है व इसमें केजीपी न्यूज की सहमति या असहमति अनिवार्य नहीं है।

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