




जीवन की सबसे कठिन परीक्षा केवल किताबों से नहीं, बल्कि परिस्थितियों से भी होती है। पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर से एक ऐसा ही भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक छात्रा ने अपार व्यक्तिगत दुख के बावजूद अपनी शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल पेश की है।मेदिनीपुर के मियांबाजार इलाके की रहने वाली ‘बिलकिस खातून’ ने गुरुवार को अपनी उच्च माध्यमिक (कक्षा 12वीं) की परीक्षा दी, जबकि उसकी मां का पार्थिव शरीर अस्पताल के शवगृह (मर्चुरी) में रखा हुआ था।परीक्षा से ठीक पहले टूटा दुखों का पहाड़




जानकारी के अनुसार, विद्यासागर विद्यापीठ बालिका विद्यालय की छात्रा बिलकिस की मां, सुल्ताना बेगम (43), पिछले काफी समय से बीमार चल रही थीं। बुधवार शाम अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजन उन्हें आनन-फानन में मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।चूंकि मृत्यु अस्पताल पहुंचने से पहले हुई थी, इसलिए मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी में रखा गया।आंखों में आंसू और हाथ में कलमगुरुवार को बिलकिस का संस्कृत का पेपर था। मां के निधन की खबर से बिलकिस पूरी तरह टूट चुकी थीं, लेकिन उनके परिवार और स्कूल की शिक्षिकाओं ने उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने बिलकिस को समझाया कि उसकी मां का सपना उसे शिक्षित देखना था।अत्यधिक मानसिक पीड़ा और शोक के बावजूद, बिलकिस मिशन गर्ल्स हाई स्कूल स्थित अपने परीक्षा केंद्र पहुंचीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिलकिस की आंखों में आंसू थे, लेकिन उनके हौसले ने सबको प्रभावित किया। परीक्षा खत्म करने के तुरंत बाद वह सीधे अस्पताल पहुंचीं, जहां उनकी मां का शव रखा था।

शिक्षा जगत ने की सराहनाविद्यासागर विद्यापीठ की प्रधानाध्यापिका स्वाति बंद्योपाध्याय ने बताया कि स्कूल प्रशासन को जैसे ही इस दुखद घटना का पता चला, उन्होंने छात्रा को हर संभव मानसिक सहयोग देने की कोशिश की ताकि वह सामान्य रूप से परीक्षा दे सके। वहीं, जिला निगरानी समिति के संयुक्त संयोजक रामजीवन मांडी ने भी छात्रा के साहस की सराहना करते हुए कहा कि पूरा विभाग इस दुख की घड़ी में उसके साथ है।यह घटना न केवल बिलकिस के संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कठिन से कठिन समय में भी शिक्षा और कर्तव्य के प्रति निष्ठा एक नई राह दिखा सकती है।









