





केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए दक्षिण भारतीय राज्य ‘केरल’ का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ (Keralam) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया।



भाषाई पहचान को मिला सम्मान:-

केरल सरकार और वहां के स्थानीय निवासी लंबे समय से राज्य का नाम बदलने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क है कि मलयालम भाषा में राज्य का असली नाम ‘केरलम’ ही है। ‘केरल’ शब्द का इस्तेमाल मुख्य रूप से अंग्रेजी और आधिकारिक दस्तावेजों में किया जाता रहा है, जो औपनिवेशिक काल की देन माना जाता है।
विधानसभा ने पारित किया था प्रस्ताव:-
केरल विधानसभा ने जून 2024 में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र सरकार से संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने का आग्रह किया गया था। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस प्रस्ताव को पेश करते हुए कहा था कि मलयालम बोलने वाले लोगों के लिए एकजुट राज्य बनाने का संघर्ष स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही ‘केरलम’ नाम के साथ जुड़ा हुआ है।
क्या होगी आगे की प्रक्रिया?
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू होगी:राष्ट्रपति की भूमिका: अब राष्ट्रपति इस प्रस्ताव को केरल विधानसभा के पास उनके विचारों के लिए भेजेंगे।संसद में विधेयक: राज्य विधानसभा की राय मिलने के बाद, केंद्र सरकार ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को संसद में पेश करेगी।संवैधानिक संशोधन: संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद, संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ हो जाएगा।
प्रशासनिक और सांस्कृतिक महत्व:-
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव मुख्य रूप से सांस्कृतिक और भाषाई गौरव से जुड़ा है। इससे राज्य की सीमाओं या प्रशासनिक कामकाज पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि यह राज्य की मूल पहचान को और मजबूती प्रदान करेगा।इससे पहले भी भारत के कई राज्यों और शहरों के नाम बदले जा चुके हैं, जैसे उत्तरांचल से उत्तराखंड और उड़ीसा से ओडिशा। अब इसी कड़ी में ‘केरल’ का नाम भी जुड़ने जा रहा है।










