





पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की आशंकाओं के बीच घरेलू गैस सिलेंडरों के संकट ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। खड़गपुर के मालंच सुपर मार्केट स्थित एक गैस एजेंसी के बाहर आज शुक्रवार की सुबह से ही उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखी गई। स्थिति यह है कि लोग सुबह की पहली किरण के साथ ही लाइनों में लग रहे हैं, लेकिन गैस मिलने की कोई गारंटी नहीं दिख रही।



घरेलू सिलेंडरों की हो रही कालाबाजारी:-

स्थानीय लोगों का आरोप है कि व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडरों की आपूर्ति में सख्ती और बढ़ती कीमतों के कारण होटल, रेस्तरां और छोटे खाने के स्टालों पर अब धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडरों का उपयोग हो रहा है। आरोप यह भी है कि गैस एजेंसी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से घरेलू सिलेंडरों को ऊंचे दामों पर काले बाजार (Black Market) में बेचा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए कृत्रिम संकट पैदा हो गया है।
जनता की जुबानी: मजबूरी और आक्रोश:-
मालंच में गैस के लिए लाइन में खड़ी उर्मिला यादव ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा:”मैं सुबह पांच बजे से लाइन में खड़ी हूं। यहाँ से पर्ची (स्र्लिप) कटवाने के बाद मुझे दूर स्थित गोदाम से गैस लेनी होगी। घर में गैस खत्म हो चुकी है, खाना बनाने में भारी समस्या हो रही है।”वहीं, लाइन में खड़े नरसिंग राव और विजय कुमार साव जैसे उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें अपने जरूरी काम और दिहाड़ी छोड़कर सुबह-सुबह गैस के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्होंने डर जताया कि अगर इतनी मशक्कत के बाद भी गैस नहीं मिली, तो उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो जाएगा।
प्रशासनिक आश्वासन और जमीनी हकीकत:-
हालांकि प्रशासन और गैस कंपनियों की ओर से आपूर्ति सामान्य होने के आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। कालाबाजारी और रसूखदारों को प्राथमिकता मिलने के कारण “आम आदमी” को घंटों कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।यह देखना चुनौतीपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन इस कालाबाजारी को रोकने और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के लिए क्या कड़े कदम उठाता है।










