




खड़गपुर: पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में राजनीतिक और कानूनी खींचतान के बाद एक बार फिर कल्याणी घोष ने नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी संभाल ली है। कलकत्ता हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद शुक्रवार को कल्याणी घोष और उपाध्यक्ष तैमूर अली खान ने औपचारिक रूप से अपना कार्यभार ग्रहण किया।क्या था पूरा मामला?विवाद की शुरुआत 21 जनवरी को हुई थी, जब राज्य के नगर विकास विभाग ने खड़गपुर नगर पालिका के बोर्ड को भंग करने का निर्देश जारी किया था। इसके साथ ही, महकमा शासक (SDO) को प्रशासक के रूप में नियुक्त कर दिया गया था। राज्य सरकार के इस फैसले को विपक्षी पार्षदों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।कोर्ट का हस्तक्षेप और आदेश9 फरवरी को न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के फैसले को अनुचित बताया। अदालत ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय दिए:नगर विकास विभाग द्वारा बोर्ड को भंग करने के निर्देश को रद्द कर दिया गया।19 दिसंबर को जारी किए गए ‘कारण बताओ’ नोटिस (Show Cause Notice) को भी खारिज कर दिया गया।SDO को प्रशासक नियुक्त करने के निर्णय को अवैध घोषित किया गया।दोबारा कार्यभार ग्रहणगुरुवार शाम को विपक्षी पार्षदों ने अदालत के आदेश की कॉपी महकमा शासक को सौंपी। इसके बाद शुक्रवार सुबह SDO ने कल्याणी घोष और तैमूर अली खान को बुलाकर उन्हें पुनः जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया पूरी की।अध्यक्ष की कुर्सी पर दोबारा बैठने के बाद कल्याणी घोष ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा:”अदालत का फैसला हमारे पक्ष में आया है, जिससे हम बहुत खुश हैं। हम पहले की तरह ही जनता के लिए काम करना जारी रखेंगे।”कार्यालय पहुँचने पर कल्याणी घोष ने सभी विभागों का दौरा किया और कर्मचारियों से मुलाकात की। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यभार संभालने से पहले उन्होंने पार्टी के जिला अध्यक्ष को इसकी सूचना दे दी थी।विपक्ष की प्रतिक्रियाविपक्षी पार्षदों का मानना है कि बोर्ड को भंग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ था। उनका कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के होने से जनता की समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से हो पाता है, जो प्रशासक के शासन में मुमकिन नहीं था।














