




रेलवे शहर खड़गपुर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राज्य सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाले खड़गपुर नगरपालिका बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) को बोर्ड के प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया है। यह घटनाक्रम 60 के दशक की याद दिलाता है जब तत्कालीन अध्यक्ष क्षितीश चाकी के कार्यकाल के दौरान भी इसी प्रकार बोर्ड को भंग किया गया था।




क्यों लिया गया यह फैसला?

नगरपालिका बोर्ड पर पिछले काफी समय से बुनियादी नागरिक सुविधाएं प्रदान करने में विफल रहने के आरोप लग रहे थे।
जनता की शिकायतें: स्थानीय निवासियों ने पीने के पानी की कमी, कचरा प्रबंधन में लापरवाही और सड़कों पर खराब स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं को लेकर नगर विकास और नगर मामलों के विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी।
जांच रिपोर्ट: प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट में इन शिकायतों को सही पाया गया।
बोर्ड की बर्खास्तगी: रिपोर्ट के आधार पर प्रधान सचिव ने बोर्ड ऑफ काउंसिलर्स को अयोग्य घोषित करते हुए उन्हें पद से हटा दिया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
बोर्ड के भंग होने के बाद शहर का राजनीतिक पारा चढ़ गया है:
कांग्रेस और वाम दल: कांग्रेस पार्षद मधु कामी और माकपा (CPIM) जिला सचिव सबरूज्ज घोराई ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह निर्णय प्रशासन की विफलता को दर्शाता है और भ्रष्टाचार को और बढ़ावा दे सकता है।
विपक्ष का रुख: जिला कांग्रेस अध्यक्ष देबाशीष घोष ने कहा कि नगरपालिका के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा। विपक्षी दलों ने शुक्रवार को एक बैठक कर आगामी रणनीति पर चर्चा की।
इतिहास की पुनरावृत्ति
खड़गपुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही है जैसी 60 के दशक में हुई थी। उस समय क्षितीश चाकी के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बोर्ड को भंग कर प्रशासक बिठाया गया था। अब दशकों बाद, वर्तमान बोर्ड की अक्षमता ने फिर से वही हालात पैदा कर दिए हैं।
आगे क्या होगा? प्रशासक के रूप में कार्यभार संभालने के बाद एसडीएम अब शहर की नागरिक सेवाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन जनता की समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी कर पाता है और नई बोर्ड के गठन को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।





