





पश्चिम बंगाल के खड़गपुर शहर में पिछले काफी समय से विवादों में रहा ‘चांदमारी मैदान’ मार्ग एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र बन गया है। दक्षिण साइड और चांदमारी को जोड़ने वाली इस मुख्य सड़क को लेकर लंबे समय से चल रहा गतिरोध अब और गहरा गया है।



क्या है पूरा मामला?

खड़गपुर के रेलवे अधिकारी क्लब और रेलवे रेस्ट हाउस के बीच से गुजरने वाली यह सड़क स्थानीय निवासियों के लिए आवाजाही का मुख्य जरिया है। कुछ समय पूर्व, खड़गपुर की तत्कालीन पूर्व ए़डीआरएम मनीषा गोयल ने कड़ा रुख अपनाते हुए सुरक्षा और अन्य कारणों का हवाला देकर इस रास्ते को दोनों छोर से सील करवा दिया था और वहां दीवार खड़ी कर दी गई थी।
इस कदम का स्थानीय जनता के साथ-साथ राजनीतिक दलों ने भी पुरजोर विरोध किया था। रास्ते के बंद होने से लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी, जिससे दैनिक जीवन काफी प्रभावित हुआ।
तबादला होते ही एक्शन में भाजपा:-
खबरों के अनुसार, जैसे ही मनीषा गोयल का तबादला हुआ, उसके कुछ ही घंटों के भीतर भाजपा कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। कार्यकर्ताओं ने रेलवे प्रशासन द्वारा बनाई गई दीवार को ढहा दिया और जनता के लिए रास्ता आंशिक रूप से साफ कर दिया। भाजपा का कहना है कि यह कोई राजनीति नहीं बल्कि “सामाजिक नीति” है और उन्होंने यह कदम जनहित में उठाया है।
तृणमूल (TMC) का पलटवार:-
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि जब उन्होंने पहले इस दीवार का विरोध किया था, तो उनके कार्यकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई की गई और केस दर्ज किए गए।
टीएमसी के मुख्य आरोप:
•भाजपा ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है।
•रेलवे प्रशासन (RPF) उस समय मूकदर्शक क्यों बना रहा जब दीवार तोड़ी जा रही थी?
•दीवार टूटने के विवाद में जिन पांच निर्दोष रेल कर्मचारियों का तबादला किया गया है, उन्हें तुरंत वापस बुलाया जाए।
राजनीतिक मोड़:-
चुनावी माहौल के बीच इस घटना ने खड़गपुर की राजनीति में उबाल ला दिया है। जहां भाजपा इसे अपनी जीत और जनता की सेवा बता रही है, वहीं टीएमसी इसे कानून का उल्लंघन और भाजपा का दोहरा चरित्र करार दे रही है। स्थानीय निवासियों के लिए रास्ता खुलना राहत की बात तो है, लेकिन प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता यह तनाव आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेगा, यह देखना बाकी है।









