खड़गपुर: मुआवजा और रोजगार की मांग को लेकर 9 मार्च को बिरला पेंट कारखाने की तालाबंदी का ऐलान

March 2, 2026 4:57 PM

पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में भूमिदाताओं और स्थानीय युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। ‘लैंड लूजर जॉइंट मूवमेंट कमेटी’ ने घोषणा की है कि आगामी 9 मार्च को विद्यासागर इंडस्ट्रियल पार्क स्थित बिरला पेंट कारखाने (ग्रासिम) के मुख्य द्वार पर विशाल घेराव और प्रतीकात्मक तालाबंदी की जाएगी।

मुख्य मुद्दे और मांगें:

सोमवार को गोलखोली स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमेटी के नेताओं ने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। आंदोलनकारियों का मुख्य विरोध निम्नलिखित बिंदुओं पर है:

अधूरे वादे: जिन किसानों ने उद्योग लगाने के लिए अपनी जमीनें दी थीं, उन्हें न तो अब तक उचित मुआवजा मिला है और न ही स्थाई रोजगार दिया गया है। इसके अलावा, पुनर्वास से जुड़े अन्य बुनियादी वादे भी पूरे नहीं किए गए हैं।

स्थानीय युवाओं की अनदेखी: कमेटी के नेताओं का आरोप है कि खड़गपुर के शिक्षित युवाओं (B.Tech, M.Tech, ITI पास) को नजरअंदाज कर दूसरे जिलों के लोगों को काम पर रखा जा रहा है।

प्रशासनिक विफलता: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई बार ज्ञापन देने और बैठकों का समय तय होने के बावजूद प्रबंधन आखिरी समय पर पीछे हट जाता है, जिससे प्रशासन पर से उनका भरोसा उठ गया है।

आंदोलन की रूपरेखा:

9 मार्च को होने वाले इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 5 से 7 हजार लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। यह रैली रूपनारायणपुर ब्रिज के नीचे से शुरू होकर कारखाने के गेट तक जाएगी। आंदोलनकारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे वहीं गिरफ्तारी देने या संघर्ष करने तक को तैयार हैं।

स्थानीय जनता का दर्द:

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेताओं ने भावुक होते हुए कहा, “जिस जमीन पर हम खेती कर अपना परिवार पालते थे, वह हमने कारखाने के लिए दे दी। अब अगर हमें वहीं काम नहीं मिलेगा, तो हमें जिंदा रहने का कोई फायदा नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि खड़गपुर के लोग प्रदूषण तो झेल रहे हैं, लेकिन जब रोजगार की बारी आती है, तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।इस आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों और स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) का भी समर्थन प्राप्त हो रहा है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि 9 मार्च से पहले इस समस्या का ठोस समाधान निकाला जाए।

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