खड़गपुर: शिक्षा विभाग के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे प्रभारी शिक्षक, स्कूल छूट चुकी छात्रा के भविष्य से खिलवाड़

February 19, 2026 6:22 AM

पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित ‘साउथ साइड हाई स्कूल (हिंदी माध्यम)’ में एक छात्रा के प्रवेश को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले डेढ़ महीने से एक बेबस माँ, हमीदान बीबी, अपनी स्कूल छोड़ चुकी बेटी का दोबारा दाखिला कराने के लिए स्कूल के चक्कर काट रही हैं, लेकिन स्कूल प्रशासन और जिला शिक्षा विभाग के बीच चल रही ‘ईगो की लड़ाई’ में एक छात्रा की पढ़ाई पर विराम लग गया है।

प्रभारी शिक्षक और क्लर्क पर दुर्व्यवहार का आरोप:-

पीड़ित माँ का आरोप है कि जनवरी के पहले सप्ताह से ही वह अपनी बेटी को प्रवेश दिलाने के लिए स्कूल जा रही हैं। आरोप है कि स्कूल के प्रभारी शिक्षक (TIC) आदित्य त्रिपाठी और क्लर्क (जिन्हें ‘बिल्लू दा’ के नाम से जाना जाता है) हर बार किसी न किसी बहाने से उन्हें वापस भेज देते हैं। हमीदान बीबी ने सहायता के लिए ‘मिल्लत एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट’ और ‘राजा वेलफेयर फाउंडेशन’ से गुहार लगाई। संस्था के प्रतिनिधियों ने जब स्कूल से संपर्क किया, तो प्रभारी शिक्षक ने न केवल सहयोग करने से मना कर दिया, बल्कि कथित तौर पर अभद्र और अहंकारी व्यवहार भी किया।

उच्चाधिकारियों के आदेशों की भी अनदेखी:-

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे स्कूल एसआई (SI) देबनाथ पांडा के संज्ञान में लाया गया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने उदासीनता दिखाई। इसके बाद मामला जिला शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों (ADI, DI, DEO, ADM और DM) तक पहुँचा।13 जनवरी: ADI ऑफिस ने स्कूल को पत्र लिखकर छात्रा का दाखिला सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।प्रतिक्रिया: प्रभारी शिक्षक ने कथित तौर पर यह कहते हुए निर्देश मानने से मना कर दिया कि वह ADI के पत्र को मान्यता नहीं देंगे।समग्र शिक्षा मिशन का हस्तक्षेप: डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (DEO) के निर्देश पर डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर (DI) अमित राय ने भी स्कूल को प्रवेश लेने का आदेश जारी किया।हैरानी की बात यह है कि स्कूल के प्रभारी शिक्षक ने जिला स्तर के इन लिखित आदेशों को भी ठेंगा दिखा दिया। जब इस संबंध में दोबारा DI से संपर्क किया गया, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “मैंने पत्र भेज दिया है, इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता।”

व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल:-

एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और स्कूल छूट चुके बच्चों को वापस मुख्यधारा में लाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर खड़गपुर का यह मामला प्रशासनिक विफलता की कहानी बयां कर रहा है। पीड़ित माँ का सवाल है— “क्या एक छात्रा का भविष्य अधिकारियों के अहंकार से छोटा है? अगर पूरा जिला प्रशासन मिलकर एक बच्ची का दाखिला नहीं करा सकता, तो शिक्षा मिशन के दावों का क्या आधार है?”फिलहाल, यह मामला स्थानीय मीडिया और आनंदबाजार पत्रिका में सुर्खियां बटोर रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक समाज अब इस मामले में कड़े प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि छात्रा का कीमती शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो।

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