घाटाल को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की मांग तेज, स्थानीय लोगों ने शुरू किया आंदोलन

February 11, 2026 1:22 PM

पश्चिम मेदिनीपुर के घाटाल सब-डिवीजन के निवासियों ने अपने क्षेत्र को भारतीय रेलवे के नक्शे पर लाने के लिए अपनी मांगों को फिर से तेज कर दिया है। स्थानीय लोगों और यात्री संघों ने घाटाल तक एक नई रेलवे लाइन बिछाने और लोकल ट्रेन सेवाएं शुरू करने की पुरजोर मांग की है।

मुख्य मांगें और परियोजना का इतिहास:

यात्री संघों का कहना है कि घाटाल को रेलवे से जोड़ने से न केवल स्थानीय निवासियों को सुविधा होगी, बल्कि यह महान समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जन्मभूमि बीरसिंहा को भी रेल नेटवर्क से जोड़ेगा। उल्लेखनीय है कि यह परियोजना नई नहीं है।

रिपोर्टों के अनुसार, जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं, तब इस परियोजना की पहल की गई थी। 2011-12 के रेल बजट में पांशकुड़ा-घाटाल-चंद्रकोना और घाटाल-आरामबाग सहित कई नई रेल लाइनों के सर्वेक्षण का उल्लेख किया गया था। हालांकि, इन परियोजनाओं पर प्रगति रुकी हुई है।

वर्तमान स्थिति और आंदोलन:

इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए दो साल पहले ‘विद्यासागर रेलपथ मिशन’ नामक एक संगठन का गठन किया गया था। संगठन के अध्यक्ष प्रसेनजीत कपास के अनुसार, उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाने के लिए घाटाल के सांसद देव (दीपक अधिकारी) से संपर्क किया है।

संगठन का कहना है कि पूर्वी रेलवे ने उन्हें सूचित किया है कि आरामबाग-इड़पाला-घाटाल रेल लाइन का काम 2019 के रेल बजट में स्थगित कर दिया गया था। वहीं, दक्षिण-पूर्व रेलवे ने पांशकुड़ा-घाटाल लाइन पर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं दी है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप:

इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। पश्चिम मेदिनीपुर जिला परिषद की सभाधिपति शांति टुडू ने केंद्र सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना ममता बनर्जी द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए शुरू की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार कथित तौर पर “डबल इंजन सरकार” की बात करने के बावजूद जनहित के कामों में बाधा डाल रही है।

व्यापक लाभ और अन्य यात्री समस्याएं:

इस रेल लाइन के बनने से घाटाल, चंद्रकोना, दासपुर के पांच ब्लॉकों के साथ-साथ हुगली जिले के गोघाट और आरामबाग के लोगों को भी काफी लाभ होगा।

इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनकारियों ने खड़गपुर-हावड़ा खंड पर मौजूदा रेल सेवाओं को लेकर भी शिकायतें उठाई हैं। यात्रियों का आरोप है कि मालगाड़ियों और वंदे भारत एक्सप्रेस को प्राथमिकता देने के लिए लोकल ट्रेनों को जानबूझकर दो से ढाई घंटे की देरी से चलाया जाता है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि कोरोना महामारी के बाद बंद की गई कई ईएमयू और मेमू ट्रेनों को अभी तक बहाल नहीं किया गया है, जिससे दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा हो रही है।

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