पश्चिम बंगाल के तामलुक में ‘हर्बल अबीर’ की भारी मांग, कारखानों में दिन-रात हो रहा काम

February 25, 2026 5:11 PM

रंगों का त्योहार होली (दोल उत्सव) अब करीब है और इस बार बाजार में केमिकल वाले रंगों के बजाय प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों का बोलबाला देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के तामलुक शहर में हर्बल अबीर (गुलाल) की मांग इतनी बढ़ गई है कि स्थानीय कारखानों में कारीगर दिन-रात काम में जुटे हुए हैं।

क्यों बढ़ रही है हर्बल अबीर की मांग?

पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच स्वास्थ्य और त्वचा की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। केमिकल युक्त रंगों से होने वाली त्वचा की जलन और एलर्जी से बचने के लिए अब लोग ‘हर्बल अबीर’ को प्राथमिकता दे रहे हैं। तामलुक के वार्ड नंबर 14, उत्तरचरा शंकर अरा इलाके में पिछले लगभग तीन दशकों से हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है।

कैसे तैयार होता है यह प्राकृतिक गुलाल?

कारखाने के कर्मचारियों के अनुसार, यह अबीर पूरी तरह से प्राकृतिक सामग्री से बनाया जाता है। इसे बनाने की प्रक्रिया इस प्रकार है:मुख्य सामग्री: इसमें ‘अरारोट’ (Arrowroot) का आधार के रूप में उपयोग किया जाता है।प्राकृतिक रंग: अरारोट में फूलों और पत्तियों के अर्क से तैयार प्राकृतिक रंग मिलाए जाते हैं।सुखाना और छानना: मिश्रण को अच्छी तरह मिलाने के बाद धूप में सुखाया जाता है। सूखने के बाद इसे बारीक छलनी से छाना जाता है ताकि यह त्वचा पर रेशमी और मुलायम महसूस हो।पैकेजिंग: अंत में इसे अलग-अलग वजन के पैकेटों में पैक कर बाजार में भेजा जाता है।

उत्पादन और वितरण:

एक स्थानीय कारखाने के प्रबंधक चंदन कुमार ने बताया कि उनके यहाँ 10 अलग-अलग रंगों का हर्बल अबीर तैयार किया जाता है। होली से तीन महीने पहले ही उत्पादन शुरू हो जाता है। वर्तमान में, चार कारीगर मिलकर प्रतिदिन लगभग 7.5 क्विंटल अबीर तैयार कर रहे हैं, जिसकी आपूर्ति पूरे जिले और आसपास के क्षेत्रों में की जा रही है।

विशेषज्ञों की सलाह:-

जिला आयुष अधिकारी प्रकाश हाजरा ने हर्बल रंगों के लाभों पर जोर देते हुए कहा, “रासायनिक रंगों की तुलना में हर्बल अबीर शरीर के लिए बहुत सुरक्षित है और इससे त्वचा को कोई नुकसान नहीं होता। हालांकि, उत्सव के दौरान सावधानी बरतना आवश्यक है ताकि रंग आंखों में न जाए।”इस बार की होली न केवल खुशियों भरी होगी, बल्कि सुरक्षित भी होगी, क्योंकि तामलुक के ये कारीगर प्रकृति के रंगों से त्योहार को और भी खास बना रहे हैं।

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