





भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में बहुप्रतीक्षित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की वोटर लिस्ट को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाना है।



खड़गपुर नगर पालिका में वोटर लिस्ट आज लगाया गया जिसे दोपहर में ही फाड़ फेंका गया। इस संबंध में फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नगर पालिका प्रशासन से नहीं मिली है।

SIR रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े:
नामों की कटौती: रिपोर्ट के अनुसार, अकेले बांकुड़ा जिले में लगभग 1.18 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यह कार्रवाई मृत्यु, पलायन (Migration) और दोहरी प्रविष्टियों (Duplicates) की पुष्टि होने के बाद की गई है।
तीन श्रेणियां: इस नई लिस्ट में मतदाताओं को तीन भागों में बांटा गया है— Approved (स्वीकृत), Deleted (हटाए गए) और Under Adjudication (विचाराधीन)।
पेंडिंग केस: राज्य भर में लगभग 60 लाख नामों को ‘Under Adjudication’ श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि इनकी पात्रता पर अभी भी फैसला होना बाकी है और भविष्य में सप्लीमेंट्री लिस्ट के जरिए इनकी स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
न्यायिक अधिकारियों की भूमिका:-
इस बार की SIR प्रक्रिया ऐतिहासिक रही क्योंकि इसमें 500 से अधिक न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, झारखंड और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों के न्यायाधीशों ने भी बंगाल में दस्तावेज़ों की जांच और सुनवाई में मदद की ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
कैसे चेक करें अपना नाम?
(स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)यदि आप बंगाल के निवासी हैं, तो आप निम्नलिखित तरीकों से SIR फाइनल लिस्ट में अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं:
**ऑनलाइन पोर्टल: चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं।
**सर्च बाय EPIC: अपना वोटर आईडी नंबर (EPIC Number) डालकर ‘Search’ करें।
**ऑफलाइन माध्यम: अपने स्थानीय BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) के पास जाएं या BDO/SDO कार्यालय में प्रदर्शित हार्ड कॉपी में अपना नाम देखें।
**मार्क चेक करें: यदि आपके नाम के आगे “Deleted” लिखा है, तो आप जिला चुनाव अधिकारी (DEO) के पास अपील कर सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह SIR प्रक्रिया?
पश्चिम बंगाल में पिछले 21 वर्षों (2004 के बाद) में पहली बार इतनी व्यापक स्तर पर ‘Special Intensive Revision’ किया गया है। इसका मकसद उन पुराने डेटा को हटाना था जो अब प्रासंगिक नहीं हैं और नए पात्र युवाओं को वोट देने का अधिकार देना है। चुनाव आयोग का लक्ष्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू करना है।








