





भारतीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव यानी विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बजा दी है। राज्य की सभी 294 सीटों के लिए चुनावी कार्यक्रम की घोषणा करते हुए आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार मतदान की प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिससे पहले नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।



मतदान और मतगणना की महत्वपूर्ण तिथियां:-

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को आयोजित किया जाएगा। इसके ठीक छह दिन बाद, 29 अप्रैल 2026 (बुधवार) को दूसरे चरण की वोटिंग होगी। पूरे राज्य के भाग्य का फैसला 4 मई 2026 (सोमवार) को होगा, जब मतों की गिनती की जाएगी और चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
नामांकन प्रक्रिया का विवरण:-
चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा भी तय कर दी गई है। प्रथम चरण के लिए नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल है, जिसकी जांच (Scrutiny) 7 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 9 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकेंगे।वहीं, द्वितीय चरण के लिए नामांकन पत्र 9 अप्रैल तक जमा किए जा सकेंगे। इन पत्रों की जांच 10 अप्रैल को होगी और नाम वापसी के लिए 13 अप्रैल तक का समय दिया गया है।
चरणवार जिलों का विभाजन:-
प्रथम चरण (23 अप्रैल): इस चरण में उत्तर बंगाल और पश्चिमी जिलों को प्राथमिकता दी गई है। इसमें पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, बीरभूम, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, जलपाईगुड़ी, मालदह, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, पश्चिम बर्धमान, दार्जिलिंग, कूचबिहार, अलीपुरद्वार और कालिम्पोंग जैसे जिले शामिल हैं।
द्वितीय चरण (29 अप्रैल): दूसरे और अंतिम चरण में राज्य के मध्य और दक्षिणी हिस्सों के प्रमुख केंद्रों पर मतदान होगा। इसमें राजधानी कोलकाता सहित हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया और पूर्व बर्धमान के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
चुनाव से जुड़े प्रमुख तथ्य:-
इस बार पश्चिम बंगाल के लगभग 6.44 करोड़ मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए तैयार हैं। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग ने साफ किया कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।आचार संहिता लागू होते ही प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।







