





पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक बार फिर प्रसूति की मौत को लेकर तनाव व्याप्त हो गया है। मृत महिला के परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मेदिनीपुर कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है।



क्या है पूरा मामला?

मृतका की पहचान 32 वर्षीय मोनिका करण गोराई के रूप में हुई है, जो पश्चिम मेदिनीपुर के केशपुर थाना क्षेत्र के पुरुनबेरा गांव की रहने वाली थी। परिजनों के अनुसार, मोनिका को शुक्रवार सुबह करीब 4:30 बजे अस्पताल के ‘मातृमा’ विभाग में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने सिजेरियन (C-section) के लिए कहा था, लेकिन डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव (Normal Delivery) का इंतजार किया।सुबह करीब 10:30 बजे मोनिका ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसका वजन लगभग 4 किलो बताया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद मोनिका की सुध नहीं ली गई। अधिक रक्तस्राव के कारण उसकी हालत बिगड़ने लगी और उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी।
परिजनों के गंभीर आरोप:-
मृतका के भाई विधान गोराई ने बताया, “बच्चे का वजन 4 किलो था, फिर भी सिजेरियन नहीं किया गया। नॉर्मल डिलीवरी के बाद भी उसे लंबे समय तक बिना टांके लगाए छोड़ दिया गया। डॉक्टरों और नर्सों की लापरवाही के कारण ही उसकी जान गई।” वहीं, मृतका की ननद चीनू राय ने कहा कि जब हालत बिगड़ी तो उन्होंने मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मना कर दिया और रात 8 बजे उसकी मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया:-
इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी उत्तेजना देखी गई। मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक इंद्रनील सेन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अस्पताल की एक विशेष समिति मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत मामले की जांच करेगी। फिलहाल नवजात शिशु को NICU में रखा गया है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।गौरतलब है कि मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में पहले भी प्रसूति मौतों को लेकर विवाद हो चुके हैं, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठ रहे हैं।










