




सोशल मीडिया पर मशहूर होने और ‘वायरल’ होने की चाहत कभी-कभी इंसान को मुसीबत में डाल सकती है। पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के बेलदा इलाके में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ एक युवक ने चलती ट्रेन से नीचे फेंके जाने की झूठी कहानी गढ़ी। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और पूछताछ के बाद युवक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली।




क्या है पूरा मामला?घटना रविवार सुबह करीब 10 बजे की है, जब मुर्शिदाबाद के बेलडांगा का रहने वाला मानारुल शेख (25) पैदल चलते हुए बेलदा थाने पहुँचा। उसने पुलिस को बताया कि वह बेंगलुरु से लौट रहा था। उसने आरोप लगाया कि ट्रेन में दो यात्रियों ने उसे ‘बांग्लादेशी’ होने के संदेह में आधार और पैन कार्ड दिखाने को कहा और फिर बेलदा के बाखराबाद स्टेशन के पास चलती ट्रेन से नीचे धक्का दे दिया।पुलिस को कैसे हुआ संदेह?युवक की शिकायत मिलते ही पुलिस उसे तुरंत बेलदा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ले गई। लेकिन जब डॉक्टरों ने उसकी जांच की, तो शरीर पर कोई गंभीर चोट के निशान नहीं मिले। इतनी ऊंचाई और रफ्तार से गिरकर भी सुरक्षित रहने की बात पुलिस को हजम नहीं हुई। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो मानारुल के बयानों में कई विसंगतियां (contradictions) पाई गईं।वायरल होने के लिए रची साजिशमामले को खड़गपुर जीआरपी (रेलवे पुलिस) को सौंप दिया गया। गहन पूछताछ के बाद युवक टूट गया और उसने स्वीकार किया कि उसे किसी ने धक्का नहीं दिया था, बल्कि वह खुद ही ट्रेन से उतरा था। जब उससे कारण पूछा गया, तो उसने कबूल किया कि उसने केवल ‘वायरल’ होने के चक्कर में यह सब किया।

परिजनों के सुपुर्द किया गया युवकरविवार शाम को मानारुल के परिवार वाले खड़गपुर जीआरपी थाने पहुँचे। उसके पिता आजाद अली और भाई जियाउल शेख ने बताया कि मानारुल बेंगलुरु में राजमिस्त्री का काम करता था और उसका स्वभाव थोड़ा चंचल है। परिजनों ने उसकी मानसिक स्थिति का हवाला देते हुए पुलिस से माफी मांगी।खड़गपुर जीआरपी के प्रभारी (IC) अभिजीत चटर्जी ने बताया कि युवक ने अपनी गलती मान ली है, इसलिए उसे बिना किसी सजा के उसके परिवार को सौंप दिया गया है। युवक और उसका परिवार अब अपने घर मुर्शिदाबाद के लिए रवाना हो गए हैं।










