युवक की रहस्यमय मृत्यु, परिवार ने हत्या का आरोप लगा काटा बवाल
पश्चिम मिदनापुर जिले के दांतन थाना क्षेत्र अंतर्गत षड़रंग गांव में शनिवार सुबह एक गहरी चिंता उत्पन्न करने वाला मामला सामने आया। गांव के एक पुकुर (तालाब) किनारे से शेख सलीम (20 वर्ष) का शव बरामद हुआ। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। घटना को लेकर परिजनों ने बवाल काटा। पता चलाह कि सलीम अविवाहित था। पहले चेन्नई में काम करता था बीते कुछ महीनो से यहीं रह रहा था। सलीम सात भाई बहनों में सबसे बड़ा है। तीन बहनों की शादी हो चुकी है।
परिवार का पक्ष:
शेख सलीम घर से शुक्रवार शाम को बाहर गए थे, पर रात तक वापस नहीं लौटे। अगले दिन सुबह उनके शव को घर से कुछ दूरी पर पुकुर के किनारे पर देखा गया। उनका परिवार ही उन्हें वहीं से तलाशकर शव लाया।
सलीम की माता, नासिमा बीबी, ने इसे हत्या बताया है:
> “मेरे बेटे को किसी ने मार डाला है।”
वहीं परिवार का आरोप है कि पुकुर के मालिक ने मछली चोरी से बचने के उद्देश्य से वहाँ के चारों ओर इलेक्ट्रिक तार बिछा रखी थी। उनके कथनानुसार, शेख सलीम उसी तार की वजह से विद्युत् तड़ित हो गए।
पुलिस कार्रवाई और शुरुआती जांच:
घटना स्थल पर पहुंची दांतन थाना पुलिस ने प्राथमिक जांच की शुरुआत कर दी है। पुलिस सूत्र बताते हैं कि मृतक के परिवार और आसपास के लोगों की शिकायत के आधार पर मछली पालन करने वाले पुकुर के मालिक और उनके कुछ परिजनों को हिरासत में लिया गया है। थानाध्यक्ष द्वारा बताया गया जब तक शव का पीएम रिपोर्ट नहीं आ जाती, मृत्यु की सटीक वजह स्पष्ट नहीं होगी।
पुलिस ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि हालात नियंत्रण में हैं और वे मामले की निष्पक्ष और तेज़ी से जांच सुनिश्चित कर रही है।
मृत्यु का प्रारंभिक निष्कर्ष और आगे की प्रक्रिया:
स्थानीय अधिकारियों का प्रारंभिक मानना है कि उच्च वोल्टेज तार से विद्युत् प्रवाह के संपर्क में आने से शेख सलीम की मौत हुई हो सकती है, लेकिन इस बात की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी प्रकार का संदेह या अस्पष्टता पाई जाती है, तो मामला और गहराई से जांचा जाएगा और ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी।
परिणाम और समाज पर विचारशील संदेश:
यह दुखद घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि किसी की जानलेवा घटना को लेकर पहले से किसी निष्कर्ष पर पहुँचना या संवेदना से रहित निर्णय लेना कितना खतरनाक हो सकता है। जब तक वैज्ञानिक रूप से जांच पूरी न हो जाए, किसी पर आरोप लगाने में सावधानी बरतना आवश्यक है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पारदर्शी जांच ही इस परिजन की पीड़ा और समाज की उम्मीद को न्याय तक पहुंचा सकती है।