January 22, 2026

तमलुक में श्राद्ध-मूहूर्त के साथ आरंभ हुई श्यामा वंदना

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पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के ऐतिहासिक शहर तमलुक में रविवार की सुबह से ही भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहाँ की मान्यता के अनुसार, शहर में होने वाली किसी भी काली पूजा की शुरुआत तब ही होती है जब सबसे पहले माँ बर्गभिमा की पूजा संपन्न की जाती है। इस परंपरा को निभाते हुए, तमलुक के प्राचीन बर्गभिमा मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और इसके साथ ही पूरे शहर में श्यामा वंदना की शुरुआत हुई।

माँ बर्गभिमा मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब:

सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। भक्तों ने पहले देवी के चरणों में फूल चढ़ाए, फिर आरती और दीपदान किया। देवी की आराधना के बाद ही पूरे तमलुक शहर में रंगीन मंडपों और सजे हुए पंडालों में काली पूजा का शुभारंभ हुआ।

बर्गभिमा: श्रद्धा और पौराणिक इतिहास का प्रतीक

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सती के शरीर का बायाँ पाँव जहाँ गिरा था, वही स्थान आज तमलुक के रूप में जाना जाता है। इसी स्थान पर माँ बर्गभिमा की स्थापना हुई, जिन्हें भीमाकाली के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर शक्ति पीठों में से एक माना जाता है, जहाँ देवी दुर्गा, काली और जगद्धात्री की पूजा पूरे वर्ष की जाती है।

 

काली पूजा के अवसर पर मंदिर को फूलों और दीपों से सजाया गया। देवी को रेशमी वस्त्रों और स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया गया, जिससे मंदिर का वातावरण और भी दिव्य हो उठा।

विधि-विधान और पूजन क्रम:

सुबह भोर-स्नान के बाद देवी की विशेष पूजा आरंभ हुई।

ब्रह्ममुहूर्त में मंत्रोच्चारण और वेदपाठ के साथ अनुष्ठान शुरू हुआ।

दिनभर देवी की आराधना जारी रही और शाम को महायज्ञ एवं दीपदान का आयोजन हुआ।

पूरे मंदिर परिसर को फूलों, दीयों और रोशनी से सजा दिया गया, जिससे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया।

आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम:

इस अवसर पर न केवल स्थानीय लोग, बल्कि आसपास के क्षेत्रों — हावड़ा, कांथी, वर्द्धमान और कोलकाता से भी अनेक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचे। भक्तों का मानना है कि तमलुक की हर शुभ शुरुआत माँ बर्गभिमा की अनुमति के बिना अधूरी रहती है।

तमलुक की यह पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि बंगाल की संस्कृति और लोकपरंपरा का भी जीवंत उदाहरण है। इस दिन पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है, जहाँ भक्ति, संगीत, और संस्कृति एक साथ गूंजती है।

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