……….जहां बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए लोगों ने संभाला मोर्चा, पुलिस बनी रही मूकदर्शक, बंदूक लहराए गए, दहशत में हुआ चुनाव

February 28, 2022 4:35 AM

रघुनाथ प्रसाद साहू/9434243363

खड़गपुर। दोपहर लगभग ढ़ाई बजे तक जनता विद्यालय में बने बूथ में सब कुछ सामान्य चल रहा था अचानक छह सात गुंडे बंदूक के साथ जनता विद्यालय में घुस पहले 27 नंबर बूथ में सीसीटीवी कैमरा के तार निकाल प्रेसाइंडिंग अधिकारी को टेबुल ठोक धमकाते हैं फिर चुनाव एंजेट को बताते है वह काफी प्रेशर में है इसलिए यह सब करना पड़ रहा है प्रेसाइडिंग अधिकारी धमकी के बावजूद कुछ देर तक इवीएम बंद रखते है फिर दबाव में आकर खोल देते हैं फिर शुरु होता है छप्पा वोट इस बीच अफरातफरी मच जाता है व भाजपा प्रत्याशी सुरेश पांडे जो कि उसी विद्यालय के शिक्षक भी है स्थिति की गंभीरता को भापते हुए मतदान केंद्र के बाहर जमीन पर लेट जाते हैं व कहते हैं लोकतंत्र की हत्या हो रही है आज के बाद इस विद्यालय में 26 जनवरी व 15 अगस्त को झंडा नहीं फहरेगा लोग लोकतंत्र को बचाने आगे आए प्रत्याशी के अपील का असर होता है व एक एक कर आसपास के लोगों का विरोध शुरु हो जाता है आक्रोशित महिलाएं पुलिस की निष्क्रियता पर चूड़ियां दिखाती है स्थित की गंभीरता को देख थोड़ी देर बाद बदमाश वहां से चले जाते है थोड़ी देर बाद रैफ आकर आक्रोशित भीड़ को नियंत्रित करती है।

भाजपा प्रत्याशी सुरेश पांडे की मांग है कि वार्ड नौ के जनता विदायलय व भारती विद्यापीठ दोनों केंद्र में पुनर्मतादन कराया जाए मतदान के बाद लोग इवीएम मशीन को लगभग डेढ़ घंटा रोक देते है जिसके बाद खड़गपुर शहर थाना प्रभारी विश्वरंजन बनर्जी पुलिस टीम के साथ आकर लोगों को समझाने के बाद इवीएम स्ट्रांग रुम के लिए रवाना किया जाता है। भारती विद्यापीठ में दोपहर  कुछ बदमाश मुंह ढंककर घुस गए व प्रीसाईडिंग आफिसर को बंदूक दिखाकर मारपीट कर जबरन छापा वोट डालने की कोशिश की। घटना के बाद भारती विद्यापीठ प्रांगण में खूब हंगामा मचा। सीपीआई समर्थकों का कहना था कि तृणमूल के गुंडे बूथ कैपचरिंग के मकसद से वहां दाखिल हुए थे लेकिन कैपचरिंग के दौरान उनके समर्थक वहां आ जाने से वोट दखल में कामयाब न रहने पर उन्होंने वहां ईवीएम मशीन ही तोड़ डाली हांलाकि एक आरोपी को पकड़ कर रखा गया था। हांलाकि बवाल कटने के बाद भी मतदान चला व लोगों ने वोट डाले। इलाके के बुजुर्गों का कहना है कि बीते पांच छह दशक में ऐसा मतदान कभी नहीं देखा।

 

 

 

 

 

 

 

 

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