





ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। गुरुवार को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुँचे और भारत सरकार की ओर से दुख प्रकट किया।



शोक पुस्तिका में दर्ज किया संदेश:-

ईरानी दूतावास पहुँचकर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वहां रखी ‘शोक पुस्तिका’ (Condolence Book) में हस्ताक्षर किए और भारत की ओर से शोक संदेश लिखा। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने इस कठिन समय में ईरान की जनता और सरकार के प्रति भारत की एकजुटता का संदेश दिया है।
राजदूत के साथ मुलाकात और द्विपक्षीय चर्चा:
शोक व्यक्त करने के साथ-साथ विक्रम मिस्री ने भारत में ईरान के राजदूत से भी शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने भारत का आधिकारिक शोक संदेश उन्हें सौंपा। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव और कूटनीतिक जटिलताओं के बीच भारत का यह कदम ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
देरी पर विपक्ष ने उठाए थे सवाल:-
गौरतलब है कि खामेनेई के निधन के कुछ दिनों बाद भारत की ओर से यह प्रतिक्रिया सामने आई है। इस देरी को लेकर हाल ही में विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की थी। विपक्ष का तर्क था कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से घनिष्ठ वाणिज्यिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं, ऐसे में भारत को जल्द प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी।
भारत-ईरान संबंधों का महत्व:-
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं और व्यापारिक समझौते दोनों देशों की नजदीकी को दर्शाते हैं। हालांकि खामेनेई ने अतीत में कुछ मुद्दों पर भारत के खिलाफ टिप्पणी भी की थी, लेकिन वे शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु भी थे। कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भारत का यह कदम भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों की नींव को और मजबूत करेगा और पश्चिम एशिया में संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।









