





चलती ट्रेन में प्रसव (डिलीवरी) होने की एक सुखद लेकिन चुनौतीपूर्ण घटना सामने आई है। बेंगलुरु से हावड़ा जा रही ‘एसएमवीटी बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस’ (यशवंतपुर एक्सप्रेस) में एक प्रवासी श्रमिक की पत्नी ने एक सुंदर कन्या को जन्म दिया। रेलवे पुलिस की मुस्तैदी के कारण मां और नवजात बच्ची को सुरक्षित बचा लिया गया है।



क्या है पूरा मामला?

असम के दरांग जिले की रहने वाली 35 वर्षीय कचिरान नेसा अपने पति बहारुल के साथ कर्नाटक में रहती थीं। बहारुल वहां एक चाय बागान में श्रमिक के रूप में काम करते हैं। कचिरान गर्भवती थीं और डॉक्टरों ने इसी सप्ताह प्रसव की तारीख दी थी, जिसके चलते यह परिवार अपने घर असम वापस लौट रहा था।बुधवार दोपहर जब ट्रेन ओडिशा के बालेश्वर स्टेशन से आगे बढ़ी, तो कचिरान को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। ट्रेन के डिब्बे में मौजूद अन्य महिला यात्रियों ने तुरंत मदद की और उनकी सहायता से महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया।
रेलवे ने दिखाई तत्परता:-
घटना की जानकारी मिलते ही ट्रेन के टिकट परीक्षक (TTE) ने तुरंत खड़गपुर कंट्रोल रूम और रेलवे पुलिस को सूचित किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, यशवंतपुर एक्सप्रेस को आपातकालीन स्थिति में पश्चिम बंगाल के बेलदा स्टेशन पर रोकने का निर्णय लिया गया।शाम करीब 4 बजे जैसे ही ट्रेन बेलदा स्टेशन पहुंची, रेलवे पुलिस के जवानों ने मां और नवजात को ट्रेन से उतारा और तुरंत एम्बुलेंस के जरिए ‘बेलदा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल’ पहुंचाया।
वर्तमान स्थिति:-
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मां और बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। कचिरान के पति बहारुल ने रेल पुलिस और सह-यात्रियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “हम समय रहते घर पहुँचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन रास्ते में ही दर्द शुरू हो गया। रेलवे की त्वरित सहायता से ही आज मेरी पत्नी और बच्चा सुरक्षित हैं।”रेलवे प्रशासन की इस संवेदनशीलता और सह-यात्रियों के सहयोग की हर तरफ सराहना हो रही है।








