





पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार मेदिनीपुर विधानसभा सीट पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि यहाँ से SUCI (Communist) ने छात्र आंदोलन का एक चर्चित चेहरा रहीं सुश्रीता सोरेन को अपना उम्मीदवार बनाया है। कभी सड़कों पर छात्रों के हक के लिए आवाज बुलंद करने वाली सुश्रीता अब जनता की अदालत में अपनी किस्मत आजमा रही हैं।



आंदोलन की राह से चुनावी मैदान तक:

सुश्रीता सोरेन मेदिनीपुर में किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर हुए विभिन्न छात्र आंदोलनों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है। शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ और छात्रों की सुविधाओं के लिए उन्होंने कई बार प्रशासन से लोहा लिया है। स्थानीय लोगों के बीच उनकी छवि एक जुझारू और शिक्षित युवा नेता की है।
जनसंपर्क पर जोर:
चुनाव की घोषणा के बाद से ही सुश्रीता ने अपने क्षेत्र में सघन प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। वह घर-घर जाकर लोगों से मिल रही हैं और स्थानीय समस्याओं पर चर्चा कर रही हैं। सुश्रीता का कहना है कि उनका मुख्य लक्ष्य “आम आदमी की आवाज को विधानसभा तक पहुँचाना” और “शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे बुनियादी ढांचों में सुधार करना” है।
प्रमुख चुनावी मुद्दे:
सुश्रीता सोरेन और उनकी पार्टी SUCI इस बार निम्नलिखित मुद्दों के साथ मैदान में हैं:
•बेरोजगारी: युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों का सृजन।
•भ्रष्टाचार: सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन।
•शिक्षा: सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति में सुधार।
•किसानों की समस्याएं: मेदिनीपुर के ग्रामीण इलाकों में किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाना।
त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना:
मेदिनीपुर सीट पर पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा (BJP) के बीच मुकाबला देखा जाता रहा है, लेकिन सुश्रीता सोरेन की उम्मीदवारी ने इस मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। युवाओं और शिक्षित वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता विपक्षी दलों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
संपादकीय टिप्पणी: यह लेख उपलब्ध जानकारी और समाचार सूत्रों के आधार पर तैयार किया गया है। सुश्रीता सोरेन का चुनावी मैदान में उतरना बंगाल की राजनीति में युवाओं की बढ़ती भागीदारी का संकेत है।







