सुपरवाइजर ट्रेनिंग सेंटर में सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण सफाई कार्य बाधित, ठेकेदार श्रमिकों के बीच सहमति ना बन करने के कारण ठेकेदार ने काम छोड़ने की पेशकश की, श्रमिक भी अपनी मांग पर अड़े

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रघुनाथ प्रसाद साहू

खड़गपुर। साउथ साइड स्थित रेलवे के सुपरवाइजर ट्रेनिंग सेंटर में सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण बीते 15 दिनों से सफाई कार्य बाधित हो गया है। सेंटर में आज श्रमिर युनियन व  ठेकेदार के बीच मामले को बैठक हुई पर सहमति ना बन करने के कारण ठेकेदार ने काम छोड़ने की पेशकश क है इधर, श्रमिक भी अपनी मांग पर अड़े है। ज्ञात हो कि ओम इंटरप्राइजेज नामक ठेकेदार कंपनी को सुपरवाइजर ट्रेनिंग सेंटर में सफाई काम के लिए ठेका मिला है पर श्रमिकों ने छंटनी व वेतन कटौती किए जाने की बात कह बीके 15 जनवरी से काम ठप कर दिया है जिससे सफाई कार्य बाधित हो रही है। ज्ञात हो कि सेंटर में ट्रेन ड्राइवर गार्ड व अन्य कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाती है। सेंटर में फिलहाल 44 कर्मचारी कार्यरत है। मामले को लेकर सोमवार को आइएनटीटीयूसी, इंटक, एटक व बीएमएस के प्रतिनिधि ठेकेदार से मिले पर कोई बात नहीं बन पाया। आईएनटीटीयूसी नेता तपन सेनगुप्ता का कहना है कि पहले के ठेकेदार 8500 रु मासिक वेतन  के साथ पीएफ व ईएसआई देते थे पर नए ठेकेदार लक्ष्मीनारायण उर्फ अरुण सिर्फ 7,500 रु देने व पचास फीसदी स्टाफ कटिंग की बात कह रहे हैं जो कि मंजूर नहीं है। एटक नेता अयूब अली का कहना है कि ठेकेदार अन्य श्रमिकों से काम कराना चाहते हैं जो कि कतई मंजूर नहीं। इंटक नेता तपन व बीएमएस के कार्तिक भी मध्यस्थता में मौजूद थे पर कोई निर्णय नहीं निकला। भाजपा नेता श्री राव का कहना है कि वे  लोग चाहते हैं कि दोनों पक्ष के बीच समझौता हो व कोई रास्ता निकले। इस संबंध में एसटीसी के कार्यकारी प्राचार्य प्रताप नारायण भट्टाचार्य का कहना है कि रेल ने काम के लिए ठेका दे दिया है अब काम कैसे कराना है यह ठेकेदार पर निर्भर है वे लोग इस मुद्दे पर कुछ नहीं कर सकते इधर दस दिनों से काम ना हो पाने से क्षुब्घ ठेकेदार अरुण ने बताया कि फिलहाल इस माहौल में उसके लिए काम करना संभव नहीं इसलिए उन्होने काम करने में असमर्थता जता रेल प्रशासन को पत्र लिख दिया हैअरुण का कहना है कि काम को देखते हुए उन्होने टेंडर भरा था पर उसे तीन अतिरिक्त लोगों से काम लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होने कहा कि वे लोग अपने काम के लिए अपने श्रमिक से काम लेते हैं पर उसके श्रमिकों को काम नहीं करने दिया जा रहा है। अरुण ने वेतन कटौती की बात से इंकार किया है अब देखना है कि मामले में कोई सहमति बन पाती है या जिच कायम रहता है वैसे विरोध से जहां रेल को काम को नुकसान हो रहा है वहीं श्रमिकों के लिए रोजी रोटी की समस्या मुंब बाए खड़ी है।

 

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