




कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के उस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिसमें खड़गपुर नगर पालिका के निर्वाचित बोर्ड को भंग कर दिया गया था। न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने शुक्रवार को आदेश दिया कि नगर पालिका के पुराने निर्वाचित बोर्ड को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए।




विवाद की पृष्ठभूमि:-

राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने 22 जनवरी को एक आदेश जारी कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा संचालित खड़गपुर नगर पालिका बोर्ड को भंग कर दिया था। इसके बाद प्रशासन की जिम्मेदारी अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) सुरभि सिंगला को सौंप दी गई थी। सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे दिसंबर 2025 में जारी एक ‘कारण बताओ’ (show-cause) नोटिस का हवाला दिया था, जिसमें नागरिक सेवाओं को प्रदान करने में विफलता का आरोप लगाया गया था।
न्यायालय का हस्तक्षेप:-
कांग्रेस के पार्षदों और विपक्षी नेताओं ने सरकार के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सत्तारूढ़ दल (TMC) के भीतर चल रही गुटबाजी के कारण निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। सुनवाई के बाद, अदालत ने सरकार के इस कदम को अनुचित मानते हुए बोर्ड की बहाली का निर्देश दिया।
पार्षदों की प्रतिक्रिया:-
इस फैसले से विपक्षी पार्षदों ने राहत की सांस ली है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार का बोर्ड भंग करने का निर्णय “अलोकतांत्रिक” था और यह लोकतंत्र की जीत है। एक पार्षद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे बोर्ड के कामकाज में किसी भी तरह की कमी होने पर विरोध जारी रखेंगे, लेकिन निर्वाचित प्रतिनिधियों को हटाना गलत था।
खड़गपुर नगर पालिका की वर्तमान स्थिति:-
*कुल वार्ड: 35।सत्तारूढ़ दल (TMC) के पार्षद: 24।
*निर्दलीय और अन्य: 4 पार्षद (जो बाद में TMC में शामिल हुए)।
*राजनीतिक अस्थिरता: 2022 में प्रदीप सरकार को विरोध के कारण इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद कल्याणी घोष ने कमान संभाली थी।
वर्तमान में कल्याणी घोष के नेतृत्व वाला बोर्ड ही कार्यभार संभालेगा। हालांकि, पूर्व चेयरपर्सन कल्याणी घोष ने फिलहाल इस अदालती फैसले पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।






