मेदिनीपुर नगरपालिका को राज्य सरकार का कड़ा निर्देश: 5 दिनों के भीतर नागरिक सेवाएं सामान्य करने का अल्टीमेटम

September 11, 2026 12:32 AM

मेदिनीपुर नगरपालिका की नागरिक सेवाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। नगर विकास एवं नगर निकाय कार्य विभाग की ओर से एक आधिकारिक निर्देश जारी कर नगरपालिका के बोर्ड ऑफ काउंसिलर्स को आगामी 5 दिनों के भीतर सभी नागरिक सेवाओं को सामान्य करने और अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) जमा करने का आदेश दिया गया है।

​विभिन्न नागरिक सेवाओं में पाई गईं गंभीर खामियां

जारी निर्देश के अनुसार, शहर में कचरा प्रबंधन, जलनिकासी, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यक सेवाओं में भारी लापरवाही पाई गई है। इसके अलावा भवन निर्माण संबंधी अनुमति देने की प्रक्रिया, नागरिक शिकायतों के निपटारे में देरी, अस्थायी एवं अनुबंध आधारित कर्मचारियों की भर्ती और नगरपालिका के वित्तीय प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

​निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि वेस्ट बंगाल म्युनिसिपल एक्ट, 1993 की धारा 431 के तहत बोर्ड ऑफ काउंसिलर्स को तत्काल प्रभाव से आवश्यक नागरिक सेवाएं बहाल करनी होंगी। यदि तय समय सीमा के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ और रिपोर्ट जमा नहीं की गई, तो प्रशासन की ओर से विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

​विपक्षी पार्षदों ने लगाए गंभीर आरोप

इस प्रशासनिक निर्देश के सामने आने के बाद नगरपालिका के भीतर की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका बोर्ड में लंबे समय से मनमानी चल रही है।

​अमृत योजना में देरी: पेयजल से जुड़ी ‘अमृत’ योजना का काम 2024 में ही पूरा होना था, लेकिन स्थिति यह है कि कई इलाकों में पाइपलाइन होने के बावजूद पानी की आपूर्ति ठप है।

​अनियमित भर्तियां: बोर्ड ऑफ काउंसिलर्स की अनुमति या प्रस्ताव पारित किए बिना बड़े पैमाने पर अतिरिक्त कर्मियों की अवैध नियुक्तियां की गईं, जिससे नगरपालिका पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ा है।

​बैठक प्रस्तावों में हेरफेर: विरोध दर्ज कराने के बावजूद बोर्ड बैठकों के मिनट्स और प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित दिखा दिया जाता है और आपत्तियों को दरकिनार किया जाता है।

​व्यक्तिगत लाभ के आरोप: नगरपालिका प्रशासन के शीर्ष पद का दुरुपयोग कर संपत्ति और निर्माण संबंधी स्वीकृतियों में अनियमितता बरतने के भी आरोप लगाए गए हैं।

​नगरपालिका को मिले इस नोटिस के बाद अब देखना यह होगा कि बोर्ड तय समय सीमा में शहर की लचर सेवाओं को कैसे दुरुस्त करता है और सरकार के सामने क्या जवाब पेश करता है।

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