कोलकाता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: चुनाव के दौरान ‘हवा खाने’ के लिए बाइक चलाने पर रोक नहीं, लेकिन ‘ग्रुप राइडिंग’ पर पाबंदी

April 27, 2026 5:09 PM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने बाइक प्रतिबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए, चुनाव के दौरान किसी भी व्यक्ति को अपनी बाइक पर अकेले बाहर निकलने या घूमने जाने से नहीं रोका जा सकता।

​ग्रुप राइडिंग और बाइक रैलियों पर प्रतिबंध जारी

​हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश में थोड़ा संशोधन करते हुए यह निर्देश दिया है कि मतदान से 48 घंटे पहले ‘ग्रुप राइडिंग’ या समूह में बाइक चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। अदालत ने साफ़ कहा कि किसी भी तरह की बाइक रैली या दल बनाकर बाइक चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह फैसला चुनाव आयोग द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।

​क्या हैं नए दिशा-निर्देश?

​अदालत के आदेशानुसार, चुनाव के दौरान निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा:

​व्यक्तिगत आवाजाही: यदि कोई व्यक्ति अपनी निजी जरूरत के लिए या केवल घूमने (हवा खाने) के लिए बाइक लेकर बाहर निकलता है, तो पुलिस उसे नहीं रोक सकती।

​मतदान के दिन की कड़ाई: मतदान शुरू होने से 12 घंटे पहले नियमों में सख्ती बढ़ाई जाएगी। उस दौरान एक बाइक पर दो व्यक्तियों के बैठने (पिलियन राइडिंग) पर रोक रहेगी।

​विशेष छूट: मेडिकल इमरजेंसी, पारिवारिक कार्यक्रमों या स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए इस नियम में छूट दी गई है। हालांकि, आवश्यक पड़ने पर पुलिस को इसके प्रमाण दिखाने होंगे।

​पुलिस को सतर्क रहने का आदेश

​जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पुलिस को पूरी तरह सतर्क रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति व्यक्तिगत बाइक चलाने की आड़ में अशांति फैलाने या कानून का उल्लंघन करने की कोशिश करता है, तो पुलिस उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

​चुनावी माहौल और सुरक्षा

​ज्ञात हो कि राज्य में पहले चरण का मतदान संपन्न हो चुका है और दूसरे चरण के लिए मतदान 29 अप्रैल को होना है। सोमवार से ही कोर्ट के ये निर्देश प्रभावी हो जाएंगे। हाईकोर्ट ने सवाल भी उठाया कि जो पाबंदियां बाइक पर लगाई जा रही हैं, वे चौपहिया वाहनों (कारों) पर लागू क्यों नहीं हैं, और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जाना चाहिए।

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