





पश्चिम बंगाल के फलता में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे हैं। यहाँ भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) चौथे स्थान पर खिसक गई है और उसकी जमानत भी जब्त हो गई है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद हुए इस पहले चुनाव ने पुराने सभी राजनीतिक समीकरणों और हिसाब-किताब को पूरी तरह से उलट कर रख दिया है।



चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, फलता में भाजपा उम्मीदवार देवांशु पांडा ने 71.2 प्रतिशत वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 1,49,421 वोट प्राप्त हुए। उन्होंने 1 लाख 9 हजार 21 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की है। यह जीत एक नया रिकॉर्ड है, क्योंकि इसने 4 मई को घोषित हुए 293 विधानसभा सीटों के नतीजों में भाजपा की सबसे बड़ी जीत के आंकड़े को पार कर लिया है। इससे पहले सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड उत्तर बंगाल की माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट से आनंदमय बर्मन (1 लाख 4 हजार से अधिक वोट) के नाम दर्ज था।

विपक्ष की बात करें तो इस चुनाव में सीपीएम ने दूसरा स्थान हासिल किया है। सीपीएम उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी को 19.34 प्रतिशत यानी 40,625 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस 4.8 प्रतिशत (10,079) वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। वोट प्रतिशत के लिहाज से विपक्ष, भाजपा के आस-पास भी नहीं टिक पाया।
सबसे बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर तृणमूल कांग्रेस के साथ देखने को मिला है। टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को मात्र 3.7 प्रतिशत यानी केवल 7,783 वोट मिले और वे चौथे स्थान पर रहे। हालांकि प्रचार के आखिरी दिन जहांगीर खान ने चुनाव से पीछे हटने का ऐलान कर दिया था, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि भगवा लहर में टीएमसी की ऐसी करारी हार होगी कि उनकी जमानत तक जब्त हो जाएगी। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में कई सीटों पर सीपीएम और कांग्रेस की जमानत जब्त हुई थी, लेकिन फलता में यह स्थिति टीएमसी के साथ बनी है।
निस्संदेह, फलता का यह नतीजा बंगाल की राजनीति में एक नई पृष्ठभूमि तैयार होने का संकेत दे रहा है। जहां एक ओर इस प्रचंड भगवा लहर के बीच भी वामपंथी और कांग्रेस समर्थकों में एक नई उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी के लिए पार्टी के सांगठनिक ढांचे को बचाए रखने की चिंता काफी बढ़ गई है।






