





जंगल से सटे एक गांव में गुरुवार तड़के एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जिसने ग्रामीणों और वनकर्मियों को भावुक कर दिया। रात के अंधेरे में हाथियों का एक बड़ा झुंड भोजन की तलाश में गांव के पास पहुंचा था। इसी दौरान झुंड का एक नन्हा शावक एक पुराने और खुले पड़े गहरे कुएं में गिर गया।



जानकारी के अनुसार, लगभग 22-25 हाथियों का झुंड गांव के समीप एक कटहल के पेड़ के पास पहुंचा था। भोजन की तलाश में आगे बढ़ते समय शावक अचानक संकरे और गहरे कुएं में जा गिरा। कुआं काफी समय से अनुपयोगी था और उसका मुंह खुला होने के कारण हादसा हो गया।

शावक के गिरते ही हाथियों के झुंड में अफरा-तफरी मच गई। मां हाथी अपने बच्चे को बचाने के लिए लगातार प्रयास करती रही। बताया जाता है कि उसने कई बार सूंड के सहारे शावक को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन कुआं गहरा होने के कारण सफलता नहीं मिली। मां की चिंघाड़ और बेचैनी से आसपास का इलाका देर रात तक गूंजता रहा।
हाथियों की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची और बचाव अभियान शुरू किया। भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से शावक को बाहर निकालने की कोशिश की गई।
हालांकि बचाव कार्य आसान नहीं था। कुआं काफी संकरा और गहरा था, जिससे अभियान में कई घंटे लग गए। जब तक टीम शावक तक पहुंची, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद कुएं के आसपास की मिट्टी हटाकर और रस्सियों की सहायता से शावक को बाहर निकाला गया।
घटना के दौरान मां हाथी और पूरा झुंड लंबे समय तक आसपास मौजूद रहा। वनकर्मियों के अनुसार, शावक को बचाने के प्रयास में हाथियों ने भी लगातार बेचैनी दिखाई। मां अपने बच्चे को बचाने के लिए अंतिम क्षण तक प्रयास करती रही, लेकिन दुर्भाग्यवश उसे नहीं बचाया जा सका।
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर जंगल से सटे इलाकों में खुले और असुरक्षित कुओं के खतरे को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने ऐसे परित्यक्त कुओं को सुरक्षित ढंग से ढंकने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने की बात कही है। शावक की मौत से पूरे इलाके में शोक का माहौल है, जबकि मां हाथी की बेबसी और दर्द ने लोगों को भावुक कर दिया।







