




राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी करते हुए, नगर पालिका में सैकड़ों बिल्डिंग प्लान अवैध रूप से ऑफलाइन पास किए जाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है।


मामले की मुख्य बातें

सरकारी आदेश का खुला उल्लंघन: 16 अगस्त 2021 को राज्य सरकार द्वारा एक सख्त अधिसूचना जारी की गई थी। इसके तहत यह अनिवार्य किया गया था कि सभी बिल्डिंग प्लान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही पास किए जाएंगे। इस तारीख के बाद किसी भी तरह की ऑफलाइन प्रक्रिया पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी।
अवैध रूप से पास हुए सैकड़ों प्लान: सरकारी आदेश को ताक पर रखते हुए, 16 अगस्त 2021 से 16 मार्च 2022 के बीच 410 बिल्डिंग प्लान अवैध रूप से ऑफलाइन पास कर दिए गए।
हालिया प्रयास और कड़ा विरोध: हाल ही में एक बोर्ड मीटिंग में 405 अतिरिक्त अवैध बिल्डिंग प्लान पास करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, म्युनिसिपैलिटी बिल्डिंग एक्ट (Municipality Building Act) का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया गया। जब इसके खिलाफ लिखित रूप में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई, तो अंततः वह मीटिंग रद्द करनी पड़ी।
घोटाले की गहराई और भारी फर्जीवाड़ा
इस मामले को उजागर करने वाले जनप्रतिनिधि ने इसे एक संस्थागत और सुनियोजित भ्रष्टाचार बताया है। सामने आए तथ्यों के अनुसार:
फर्जी सर्टिफिकेट: कई मामलों में यह देखा गया है कि बिल्डिंग का निर्माण पूरा हुए बिना ही उन्हें ‘कम्प्लीशन सर्टिफिकेट’ (Completion Certificate) जारी कर दिए गए हैं।
जाली हस्ताक्षर: दस्तावेजों को पास कराने के लिए उच्च अधिकारियों के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signatures) का इस्तेमाल किया गया है।
नियमों की अनदेखी: एक, दो या तीन मंजिला इमारतों के लिए बनाए गए नियमों का दुरुपयोग करते हुए पांच और छह मंजिला इमारतों के प्लान अवैध तरीके से पास किए गए हैं।
आगे की कार्रवाई और जांच की मांग
इस घोटाले को करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार करार दिया गया है। मामले को सामने लाने वाले पक्ष का स्पष्ट कहना है कि किसी भी तरह का अवैध कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे नेटवर्क में शामिल अधिकारियों, प्रमोटर्स और अन्य दोषियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है, ताकि मामला अदालत तक पहुंचे और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।





