





पश्चिम बंगाल में आरजी कर अस्पताल की पीड़िता ‘अभया’ की याद में पानीहाटी में एक विशेष स्मरण समारोह का आयोजन किया गया। इस मंच पर राज्य की मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। समारोह के दौरान घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया गया और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर न्याय सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया।


अस्पतालों में 2 मिनट का मौन और भावुक श्रद्धांजलि

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार की घोषणा के अनुसार आज सुबह 11 बजे से 11:02 बजे तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मौन रखा गया, जिसे देखकर मेरी आंखों से आंसू छलक पड़े।”
उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग कॉलेजों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने सिर झुकाकर 2 मिनट के लिए ‘अभया’ को याद किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “जब तक सूरज और चांद रहेंगे, हमारी डॉक्टर बहन की यह खौफनाक याद हमेशा रहेगी, इसे कोई मिटा नहीं पाएगा।”
पुलिस को ‘जीरो टॉलरेंस’ का स्पष्ट निर्देश
महिलाओं के खिलाफ होने वाली ऐसी घटनाओं को ‘सामाजिक बीमारी’ करार देते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासन और पुलिस को खुली छूट देने की बात कही। डायमंड हार्बर के अपने दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सभी थानों के ओसी (OC) और आईसी (IC) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि महिला उत्पीड़न और बच्चों पर अत्याचार (POCSO) के मामलों में वे किसी के फोन या आदेश का इंतजार न करें।
”जो भी आवश्यक कदम हो, वह तुरंत उठाएं। इसमें किसी का भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस तरह की घटनाओं में कोई राजनीति नहीं होगी, कोई धर्म या संप्रदाय नहीं देखा जाएगा और न ही कोई भाई-भतीजावाद चलेगा। सरकार इस मामले में कोई भी कमजोरी नहीं दिखाएगी,” उन्होंने स्पष्ट किया। उन्होंने बारुईपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि यह सरकार दिखाएगी कि कानून को कितनी तेजी से लागू किया जा सकता है।
विपक्ष का कड़ा रुख: “अंत तक लड़ेंगे”
इस संवेदनशील मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “मैं भूला नहीं हूं। आप लोग निश्चिंत रहें, मुझे अपनी बातें लिखकर रखने की जरूरत नहीं होती। मेरी जो जिम्मेदारी है, वह मैं कर रहा हूं और आने वाले दिनों में भी करूंगा। हमें इसका अंत देखना ही होगा।”
प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, न्यायपालिका और समाज के सभी नागरिकों को एकजुट होकर काम करने की सख्त आवश्यकता है।





