





भारतीय रेल नेटवर्क को मजबूत करने और ट्रेनों के सुगम परिचालन के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि देश भर में रेलवे नेटवर्क के विस्तार और व्यस्त रूटों पर दबाव कम करने के लिए 4 मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर लगभग ₹9,450 करोड़ की लागत आएगी।


खड़गपुर–भद्रक रूट पर बिछेगी चौथी लाइन

इस फैसले के तहत पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से ओडिशा के भद्रक (रानीताल) तक चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को मंजूरी दी गई है।
लागत: इस प्रोजेक्ट पर लगभग ₹3,352 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
लंबाई व समयसीमा: अगले 4 वर्षों में लगभग 173 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड पर चौथी लाइन बिछाने का काम पूरा किया जाएगा।
उद्देश्य: हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेलमार्ग की क्षमता को बढ़ाना और इस व्यस्त मार्ग पर ट्रेनों की गति व समयबद्धता को सुधारना है।
स्वीकृत 4 प्रमुख रेल परियोजनाएं और उनका बजट:
खड़गपुर – भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: अनुमानित लागत ₹3,352 करोड़
भद्रक – हरिदासपुर चौथी लाइन: अनुमानित लागत ₹1,583 करोड़
गुम्मिडीपूंडी – गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: अनुमानित लागत ₹2,229 करोड़
कटक – पारादीप तीसरी और चौथी लाइन: अनुमानित लागत ₹2,286 करोड़
इन राज्यों और जिलों को मिलेगा सीधा फायदा
इन चारों परियोजनाओं के पूरा होने से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के लगभग 8 जिले सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। इसके माध्यम से कुल रेल नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर अतिरिक्त क्षमता (कैपेसिटी) जुड़ेगी।
सरकार का लक्ष्य इन सभी रेल परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरी तरह से तैयार करने का है। अतिरिक्त ट्रैक बनने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों के परिचालन में तेजी आएगी और भीड़भाड़ (कंजेशन) से बड़ी राहत मिलेगी।
बिहार में 4-लेन हाईवे को भी मंजूरी
रेलवे के साथ-साथ सड़क संपर्क को बेहतर करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार में मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा तक 4-लेन हाईवे परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस सड़क परियोजना पर लगभग ₹3,591 करोड़ का खर्च आएगा, जिससे उत्तर बिहार में यातायात और कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी।





