





कोलकाता: राज्य के सरकारी सहायता प्राप्त (Govt-aided) स्कूलों और कॉलेजों में कार्यरत तथा सेवानिवृत्त शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है और वित्त विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद बकाया पर असमंजस

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत राज्य सरकार के अधीन कार्यरत कर्मचारियों के बकाया डीए के भुगतान को लेकर प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए एक समिति का गठन कर शीर्ष अदालत को पूरी कार्ययोजना से अवगत कराया गया था।
हालांकि, सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों के बकाया डीए को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। शिक्षक संघ का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकारी सहायता प्राप्त कर्मचारियों को उनका बकाया डीए नहीं मिला है और इस मामले पर सरकार का रुख अभी तक स्पष्ट नहीं है। इसी शिकायत को लेकर शिक्षक संगठन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत में सरकार की दलील और जज की नाराजगी
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि घोषित महंगाई भत्ते के भुगतान को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और वित्त विभाग ने इस पर अभी तक कोई ठोस कदम तय नहीं किया है।
इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति ने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद राज्य का वित्त विभाग बकाया डीए का भुगतान करने में देरी क्यों कर रहा है?
17 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश
अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के वित्त विभाग को आगामी 17 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि इन कर्मचारियों के बकाये का भुगतान किस प्रकार और किस समय-सीमा के भीतर किया जाएगा।





