






खड़गपुर: शहर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक प्रमुख विनिर्माण कारखाने के बाहर सोमवार सुबह अस्थाई और ठेका श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। श्रमिकों का आरोप है कि कार्य आवंटन और सुविधाओं के वितरण में लंबे समय से पक्षपात किया जा रहा है तथा पूर्व में किए गए वादों का पालन नहीं हो रहा है।


26 दिन के काम के वादे पर मिल रहे सिर्फ 8 से 12 दिन

प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अनुबंध के तहत प्रति माह कम से कम 26 दिन का कार्य (ड्यूटी) देने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद पिछले करीब चार महीनों से उन्हें केवल 8, 10 या 12 दिन ही काम पर बुलाया जा रहा है।
श्रमिकों का कहना है कि त्योहारों के इस मौसम में इतने कम दिनों के काम के चलते उनका मासिक वेतन घटकर मात्र 6,000 से 8,000 रुपये रह गया है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना और दैनिक खर्चे चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
वेतन वृद्धि और अन्य सुविधाओं से वंचित रखने का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संयंत्र में कार्यरत अन्य विभागों जैसे सुरक्षा, हाउसकीपिंग और मेंटेनेंस कर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी की जा चुकी है, लेकिन उनके वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) के वादे को एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं किया गया।
इसके अलावा, श्रमिकों ने कैंटीन भत्ता और अन्य बुनियादी सुविधाओं में भी अनियमितताओं की शिकायत की। उनका कहना है कि पे-स्लिप में भत्ते का उल्लेख होने के बावजूद असल में उनके मूल वेतन से कटौती कर दी जाती है।
बातचीत की मांग, समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी
श्रमिकों का कहना है कि पिछले चार महीनों से वेंडर या प्रबंधन की तरफ से कोई भी उनकी समस्याओं को सुनने या बातचीत करने आगे नहीं आया। बार-बार नजरअंदाज किए जाने के बाद विवश होकर उन्हें कारखाने के गेट पर प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा।
श्रमिकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक हर महीने 26 दिन का सुनिश्चित काम, वार्षिक वेतन वृद्धि और नियमानुसार सभी भत्ते नहीं दिए जाते, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रह सकता है।






