






मेदिनीपुर: दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर आम जनता, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम मेदनीपुर जिला पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है। इस वर्ष पिछले साल की तुलना में सुरक्षा इंतज़ामों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जिसके तहत 20 नए अधिकारियों सहित 500 से अधिक अतिरिक्त पुलिस कांस्टेबल, त्वरित कार्य बल (RAF) और महिला पुलिस कर्मियों को ज़िले के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया जा रहा है।


महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान: ‘दुर्गा वाहिनी’ की शुरुआत

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के बीच सुरक्षा का भरोसा कायम करना है, ताकि वे शाम से लेकर देर रात और सुबह तक बिना किसी डर के पूजा पंडालों का भ्रमण कर सकें। इसके लिए ‘तृतीया’ से विशेष दुर्गा वाहिनी की शुरुआत की जा रही है।
महिला श्रद्धालुओं और बच्चों की सुविधा के लिए प्रमुख शहरों के व्यस्त पूजा पंडालों के पास नगर पालिकाओं के सहयोग से पर्याप्त बायो-टॉयलेट और विशेष सहायता केंद्रों की व्यवस्था की गई है।
चाक-चौबंद निगरानी और गश्त
नाका चेकिंग: पश्चिम मेदिनीपुर ज़िले की सीमाओं, प्रमुख प्रवेश द्वारों और संवेदनशील क्षेत्रों में 43 विशेष नाका पॉइंट बनाए गए हैं ताकि संदिग्ध गतिविधियों और असामाजिक तत्वों पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।
नाइट पेट्रोलिंग: देर रात शराब पीकर गाड़ी चलाने, रैश ड्राइविंग, छेड़खानी (ईव-टीजिंग) और छिनताई जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए 159 मोबाइल मोटरसाइकिल गश्ती दल तैनात रहेंगे।
सहायता केंद्र: आम जनता की मदद के लिए ज़िले भर में 63 पुलिस सहायता बूथ बनाए गए हैं। आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर 112 (ERSS) का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
साइबर अपराध और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जन-जागरूकता
सुरक्षा के साथ-साथ जागरूकता अभियानों पर भी विशेष बल दिया गया है:
साइबर सुरक्षा: साइबर अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए 44 प्रमुख स्थानों पर ‘साइबर वॉल’ स्थापित की जा रही हैं। इसके अलावा, सप्तमी से दशमी तक सचल वैन पंडालों में जाकर ऑडियो-विजुअल माध्यमों और क्विज़ के ज़रिए जनता को सतर्क करेंगी।
सामाजिक संदेश: बाल विवाह, कम उम्र में मातृत्व की रोकथाम और नशा-मुक्ति को लेकर लघु वृत्तचित्रों (शॉर्ट वीडियो) के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा।
मानवीय पहल: बुजुर्गों और अनाथ बच्चों के साथ उत्सव
प्रशासन की ओर से एक विशेष सामाजिक पहल के तहत आश्रमों के अनाथ बच्चों और अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों के साथ पूजा की खुशियाँ साझा की जाएंगी। सप्तमी के दिन इन बच्चों और बुजुर्गों को नए वस्त्र भेंट किए जाएंगे और उन्हें एक साथ पंडालों के दर्शन कराने के साथ सामूहिक भोज का भी आयोजन किया जाएगा।






