






कोलकाता: बंगाल की सभी अदालतों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और अनुशासित बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। कलकत्ता उच्च न्यायालय सहित राज्य की विभिन्न जिला अदालतों के परिसर में सिगरेट, बीड़ी, पान और गुटखा के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने की पहल की गई है। इसके साथ ही अदालत परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के लिए प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर लगाने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।


इस संबंध में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की ओर से राज्य की सभी जिला अदालतों के न्यायाधीशों को पत्र भेजकर इन प्रस्तावों पर अमल करने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

तंबाकू मुक्त परिसर और सुरक्षा बढ़ाने पर जोर
प्रस्ताव के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों पर लगे प्रतिबंध को अदालत परिसरों में कड़ाई से लागू कराया जाएगा। अदालत में आने वाले वादियों, वकीलों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य और परिसर की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि, इन नियमों को किस तरह लागू किया जाए, इस पर वकीलों के बीच चर्चा जारी है। वकीलों के एक वर्ग का सुझाव है कि अदालत परिसर में अलग से ‘स्मोकिंग ज़ोन’ तय किए जाने चाहिए ताकि पूरी तरह से अव्यवस्था न फैले।
प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर की तैयारी
अदालत परिसर में केवल तंबाकू नियंत्रण ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की भी योजना है। प्रस्ताव के तहत, अदालत में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मेटल डिटेक्टर के जरिए अनिवार्य जांच की जा सकती है।
बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के फैसले का इंतजार
अदालतों में सुरक्षा जांच और तंबाकू निषेध के इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी संगठनों से राय मांगी गई है। मुख्य न्यायाधीश ने बार काउंसिल और बार एसोसिएशन को आपस में बैठक कर अपनी लिखित राय और निर्णय सौंपने का प्रस्ताव दिया है। संगठनों की ओर से लिखित सहमति और सुझाव मिलने के बाद ही इस संबंध में आधिकारिक और अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।






