





पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में चुनावी सरगर्मी तेज होते ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सोमवार सुबह भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रत्याशी प्रदीप सरकार पर तीखा हमला बोला। घोष ने सरकार पर “समाज विरोधी तत्वों” को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है।



विवाद की जड़: महिलाओं का विरोध और सम्मान

विवाद की शुरुआत पिछले गुरुवार को हुई थी, जब खड़गपुर के पुरी गेट इलाके में स्थानीय महिलाओं ने दिलीप घोष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। महिलाओं का कहना था कि जब रेलवे ने उन्हें बेदखली का नोटिस दिया था, तब घोष उनके साथ खड़े नहीं हुए थे।
इस घटना के बाद रविवार शाम को तृणमूल कांग्रेस ने उन प्रदर्शनकारी महिलाओं को सम्मानित किया। इस कदम ने आग में घी डालने का काम किया, जिस पर दिलीप घोष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
दिलीप घोष का पलटवार:
भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने प्रदीप सरकार की आलोचना करते हुए कहा:
“प्रदीप सरकार हमेशा उन लोगों के साथ खड़े रहते हैं जो कानून का पालन नहीं करते और इलाके में अशांति फैलाते हैं। टीएमसी समाज विरोधियों को सम्मानित कर रही है। खड़गपुर की जनता सब देख रही है और इस तरह की गंदी राजनीति से किसी को हराया नहीं जा सकता।”
घोष ने आगे आरोप लगाया कि उनके चुनाव प्रचार में बाधा डाली जा रही है, दीवार लेखन मिटाया जा रहा है और पोस्टर फाड़े जा रहे हैं।
प्रदीप सरकार का रुख:
दूसरी ओर, तृणमूल प्रत्याशी प्रदीप सरकार ने अपने कार्यों का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाई थी और उन्हें सम्मानित करना उनका कर्तव्य है। सरकार ने कहा, “उन महिलाओं ने सही काम किया था। हम उन्हें सलाम करते हैं।”
स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा:
राजनीतिक हमलों के बीच दिलीप घोष बाजार में जनसंपर्क करते भी नजर आए। उन्होंने सब्जी मंडी का दौरा किया और बढ़ती कीमतों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में मछली उत्पादन की समस्या का समाधान पिछले 15 वर्षों में नहीं हो पाया है। उन्होंने वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो बंगाल को मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, खड़गपुर में भाजपा और तृणमूल के बीच का यह व्यक्तिगत और राजनीतिक मुकाबला और भी दिलचस्प होता जा रहा है। अब यह देखना होगा कि जनता इस “सियासी घमासान” का क्या जवाब देती है।









