वुडकटर मशीन से करंट लगने से व्यक्ति की मौत, नीमपुरा बाजार के पूर्व सचिव की मौत, खड़गपुर महकमा अस्पताल के पूर्व चिकित्सक डा.चौधरी की मौत को लेकर उठे प्रश्न

January 21, 2021 7:07 PM

खड़गपुर। नीमपुरा रेल बाजार के पूर्व सचिव व समाजसेवी दंडपाणी साहू का निधन हो गया। स्थानीय श्मशान घाट में उसका दाह संस्कार कर दिया गया।इधर बेलदा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति की मौत पेड़ काटने वाली मशीन से करंट लगने से हो गई।मृतक का नाम मीर आबुकालाम ( 40) बताया जाता है।पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बेलदा थाना इलाके के आकासदा गाँव में रहने वाला आबुकालाम पेशे से पेड़ काटने का काम करता था।गुरुवार की सुबह भी वह गाँव के एक घर पेड़ काटने गया था।बताया जाता है कि वह वुडकटर मशीन से पेड़ काट रहा था तभी वह करंट की चपेट में आ गया।इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया, ग्रामवासियों द्वारा उसे बेलदा ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

खड़गपुर महकमा अस्पताल के पूर्व चिकित्सक डा.चौधरी की मौत को लेकर उठे प्रश्न

खड़गपुर महकमा अस्पताल के पूर्व मुख्य चिकित्सक डा.चौधरी के असामयिक निधन को लेकर उसके बेटे जहीर चौधरी ने मेदिनीपुर मेडिकल कालेज अस्पताल की लापरवाही का आरोप लगाया है।उन्होंने कहा कि अगर खड़गपुर महकमा अस्पताल में आईसीयू की सुविधा होती तो शायद उसे पिता को बचाया जा सकता था।  ज्ञात  हो कि बीते दिनों खड़गपुर महकमा अस्पताल के प्रथम मुख्य चिकित्सक डा. महिनुद्दीन अहमद खान चौधरी का 77 वर्ष की आयु में मेदिनीपुर मेडिकल कालेज अस्पताल में निधन हो गया था। पता चला है कि डा.चौधरी पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे । खड़गपुर के कौशल्या इलाके में स्थित अपने निवास स्थान से थोड़ी दुर पर ही वे एक रोगी को देखने गए थे वहां से घर लौटने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद परिजन उन्हें खड़गपुर महकमा अस्पताल ले गए जहां से डाक्टरों ने उन्हें मेदिनीपुर मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। फिर रात में ही उन्हें मेदिनीपुर ले जाया गया वहां भी हालत खराब होने की वजह से उन्हें आईसीयु वार्ड में रखा गया व बाद में देर रात उनकी मौत हो गई। ज्ञात हो कि साल 1982 में जब खड़गपुर स्टेट हास्पिटल का आधुनिकीकरण कर उसे खड़गपुर महकमा अस्पताल बनाया गया तभी डा.चौधरी को खड़गपुर महकमा अस्पताल की बागडोर उनके हाथों में सौंप दिया गया था वे खड़गपुर महकमा अस्पताल के पहले मुख्य चिकित्सक थे।

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