चुनाव से पहले वोट बहिष्कार की चेतावनी: ‘पहले सड़क बनाओ, फिर वोट मांगने आना!’

April 11, 2026 6:23 AM

झारग्राम: चुनाव आते ही वादों की झड़ी लग जाती है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही नेता गायब हो जाते हैं। नेताओं की इसी बेरुखी से नाराज होकर बिनपुर के भेलाईडीहा अंचल स्थित बारगड़ा गांव के निवासियों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है। ग्रामीणों की साफ मांग है- “पहले विकास करो, गांव की सड़क बनाओ, उसके बाद ही वोट मांगने आना। वरना गांव में घुसने नहीं देंगे।”

मरीज को कंधे पर ले जाने की मजबूरी

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में प्रवेश करने का एकमात्र रास्ता बेहद जर्जर स्थिति में है। लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा सरकार के 15 साल बीत जाने के बाद भी गांव की सड़क पर एक टोकरी मुरम (बजरी) तक नहीं डाली गई है।

​आलम यह है कि गांव में घुसने का 3 से 4 किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह गड्ढों से भरा है। स्थिति इतनी भयावह है कि अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो उसे खटिया या कंधे पर लादकर 3 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है, तब जाकर मुख्य मार्ग पर एम्बुलेंस नसीब होती है। इसी वजह से विधानसभा चुनाव से पहले गांव वालों ने अपना कड़ा रुख अपना लिया है।

‘नर्क के दरवाजे पर रहने जैसा अहसास’

बेलपहाड़ी इलाके में भी पीने के पानी और खराब सड़कों को लेकर आम लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। प्रशासन को कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। एक स्थानीय निवासी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “यहां केवल कुछ ही घर हैं। ऐसा लगता है जैसे हम मौत के मुहाने पर रह रहे हैं। चुनाव के समय सब आते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही कोई हमारी सुध नहीं लेता। इतने सालों बाद भी सड़क क्यों नहीं बनी? अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हम इस बार मतदान से पूरी तरह दूर रहेंगे।”

सियासी आरोप-प्रत्यारोप शुरू

खराब सड़कों के इस मुद्दे पर अब राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी दल के उम्मीदवार प्रणत टुडू ने सत्ता पक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा, “यहां सड़क और पीने के पानी सहित कई गंभीर समस्याएं हैं। दूसरी तरफ दावा किया जाता है कि ‘जंगलमहल मुस्कुरा रहा है’, क्या यह बदहाली उसी का उदाहरण है?”

​वहीं, इस पूरे मामले और ग्रामीणों के विरोध पर पूर्व प्रधान और वर्तमान पंचायत सदस्य शिवानी आहिल ने फिलहाल कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। ग्रामीण अब इस बात पर अड़े हैं कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे चुनाव के बारे में कोई विचार नहीं करेंगे।

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