टीएमसी के बागी सांसदों ने नया दल बनाने के बजाय एनसीपीआई (NCPI) में क्यों किया विलय?

June 14, 2026 10:17 PM

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर बड़ी टूट सामने आई है! लोकसभा में टीएमसी के बागी सांसदों ने कोई अलग गुट या मोर्चा बनाने के बजाय एक दूसरी पार्टी में विलय कर लिया है। इस नई पार्टी का नाम ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) है।

​अब इस नई पार्टी के सदस्यों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय से लेकर देव और सायोनी घोष जैसे बड़े चेहरे शामिल हो गए हैं। यह पार्टी अब सीधे तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को अपना समर्थन देगी। लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बागी सांसदों ने टीएमसी से अलग होकर अपना खुद का नया गुट क्यों नहीं बनाया?

दल-बदल विरोधी कानून से बचने की रणनीति

एक शब्द में इसका उत्तर है—कानूनी पचड़े से बचना। ममता बनर्जी के खेमे को लगातार झटके देते हुए, रविवार (14 जून) को टीएमसी के टिकट पर चुने गए 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया।

​लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद थे, जिनमें से 20 ने बगावत कर दी है। कानून के अनुसार, किसी एक पार्टी के भीतर दो अलग-अलग मोर्चे या गुट नहीं हो सकते। अगर ऐसा होता है, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता जा सकती है। इसी कानूनी जाल से बचने के लिए बागी सांसदों ने कोई जोखिम नहीं उठाया और सीधे दूसरी पार्टी में विलय कर लिया। इसे बागी सांसदों का ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है।

ममता बनर्जी का पलटवार

बागी सांसदों के लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के आवास पर पहुंचने से पहले ही, ममता बनर्जी ने अपने दो प्रतिनिधियों—लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद और राज्यसभा सांसद सागरिका घोष—को स्पीकर ओम बिरला के पास भेज दिया। वे अपने साथ ममता और अभिषेक बनर्जी का एक पत्र लेकर गए थे।

​उस पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि संसद के नियमों और संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल के संसदीय दल के दो अलग-अलग ब्लॉक नहीं हो सकते। यदि स्पीकर इस निर्णय को मान्यता देते हैं, तो यह पूरी तरह से असंसदीय और संविधान के नियमों के खिलाफ होगा। अदालत में किसी भी चुनौती से बचने के लिए ही बागी सांसदों ने विलय की यह चाल चली है।

क्या कह रहे हैं बागी सांसद?

नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी का पंजीकरण साल 2022 में हावड़ा के बांकरा के एक पते पर हुआ था। इसी पार्टी में अब काकोली और सुदीप जैसे नेता शामिल हुए हैं।

​इस बड़े फैसले पर काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, “ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से चुने गए हम सांसदों ने आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी से अवगत करा दिया है। हमने उन्हें नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी के साथ विलय करने के अपने फैसले की जानकारी दे दी है और अलग बैठने के लिए पत्र भी सौंपा है। हमारे पास दो-तिहाई से अधिक का बहुमत है। हम राष्ट्र हित के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में काम करेंगे।”

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