





आगामी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने बड़ा दावा किया है कि इस बार राज्य में भाजपा निश्चित रूप से सरकार बनाएगी और वह भी दो-तिहाई बहुमत के साथ।



उन्होंने उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा इस चुनाव में लगभग 177 सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उनका मानना है कि राज्य में बदलाव की लहर चल रही है और जनता अब मौजूदा सरकार से नाराज़ है।

सुकांत मजूमदार ने खास तौर पर अलीपुरद्वार जिले का जिक्र करते हुए कहा कि यहां की पांचों विधानसभा सीटें भाजपा के खाते में जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर बंगाल में पार्टी की स्थिति काफी मजबूत है, जिसका सीधा फायदा चुनाव परिणाम में देखने को मिलेगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सिर्फ उत्तर बंगाल में अच्छा प्रदर्शन काफी नहीं होगा, बल्कि दक्षिण बंगाल में भी पार्टी को मजबूत पकड़ बनानी होगी।
इस जनसभा में बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद रहे। माहौल काफी उत्साहपूर्ण था और पार्टी के नेताओं ने इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश किया। सभा के बाद एक विशाल रैली भी निकाली गई, जो शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए प्रशासनिक भवन तक पहुंची। इसके बाद पार्टी के उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया।
मजूमदार ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी जिक्र किया और कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य में परिवर्तन निश्चित है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब विकास चाहती है और भाजपा ही उसे पूरा कर सकती है।
कुल मिलाकर, भाजपा इस चुनाव को लेकर काफी आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। पार्टी का फोकस खास तौर पर उत्तर बंगाल पर है, जहां वह खुद को मजबूत मानती है। वहीं, पूरे राज्य में बहुमत हासिल करने के लिए दक्षिण बंगाल में भी बेहतर प्रदर्शन करना उसके लिए जरूरी माना जा रहा है।
इस बयान से साफ है कि चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच दावे और प्रतिदावे का दौर तेज हो गया है, और आने वाले दिनों में यह मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है।
📰 शीर्षक
“पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भाजपा के जीत के दावे से गरमाई सियासत, बदलाव की उम्मीद तेज”
यह शीर्षक खबर के मुख्य भाव—चुनावी माहौल, भाजपा का दावा और राज्य में बदलाव की चर्चा—को संतुलित और यथार्थवादी तरीके से दर्शाता है।
इस दूसरी सूची की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार को भी चुनावी मैदान में उतारा गया है। उन्हें हुगली जिले की श्रीरामपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। यह सीट उनके लिए नई नहीं है, क्योंकि वे पहले भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। साल 2016 में वाम-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने इस सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब लगभग एक दशक बाद पार्टी ने फिर से उन पर भरोसा जताया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस इस सीट को लेकर गंभीर रणनीति अपना रही है।
इस सूची में अन्य कई महत्वपूर्ण नाम भी शामिल हैं। अलीपुरद्वार से मृन्मय सरकार, इस्लामपुर से गुड्डी रियाज, फरक्का से मेहताब शेख, सागरदिघी से मनोज चक्रवर्ती, बेलडांगा से शाहारुद्दीन शेख और अशोकनगर से अंशुमान राय को उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा पोटाशपुर से प्रणब कुमार महापात्र को भी टिकट दिया गया है। पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों से स्थानीय और प्रभावशाली चेहरों को मौका देकर संतुलन बनाने की कोशिश की है।
इस सूची में एक और दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। हाल ही में एक अन्य दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए काजी अब्दुल रहीम को भी टिकट दिया गया है। उन्हें बादुरिया विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। गौरतलब है कि वे पहले भी इसी सीट से जीत चुके हैं और स्थानीय स्तर पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में कांग्रेस ने उन्हें मैदान में उतारकर मजबूत संदेश देने की कोशिश की है।
इसके अलावा पार्टी ने कुछ सीटों पर बदलाव भी किया है। गाजोल सीट पर पहले घोषित उम्मीदवार को बदलकर नए चेहरे को मौका दिया गया है, जिससे साफ है कि कांग्रेस अंतिम समय तक अपनी रणनीति में सुधार कर रही है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने इस बार चुनाव में पूरी ताकत झोंकने का संकेत दिया है। सभी सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वह राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब देखना यह होगा कि यह रणनीति चुनावी मैदान में कितना असर दिखा पाती है।






