बिहार के श्रमिक बस से अपने गांव के लिए हुए रवाना प्रशासन ने दी ट्रांजिट अनुमति व कराया मेडिकल जांच, सीटू की ओर से श्रमिकों को दिए गए खाद्य सामग्री

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खड़गपुर। बिहार के 26  श्रमिक रविवार की दोपहर आज बस से बिहार के लिए रवाना हो गए रवानगी के पहले सभी का मेडिकल परीक्षण कराया गया।इस अवसर पर सीटू की ओर से श्रमिकों को कुछ खाद्य सामग्री बांटे गए। ज्ञात हो कि बिहार के जमुई व आसपास के जिले के रहने वाले कई श्रमिक जो कि फेरी का काम करते हैं लाकडाउन के कारण फंस गए थे जिसमें से 26 श्रमिकों के दल को अनुमति व खाने को लेकर गुरुवार को एसडीओ कार्यालय में हंगामा हो गया था जिसके कारण श्रमिकों ने पथारवोध कर दिया था पुलिस मारपीट व लाकडाउन तोड़ने के मामले में कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया था हांलाकि सभी जमानत पर रिहा हो गए थे। प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ये लोग अपने खर्च पर अपने गांव के लिए रवाना हो गए प्रशासन की ओर से कुल 30 श्रमिकों को बिहार जाने की अनुमति मिला थी। खड़गपुर ग्रामीण थाना प्रभारी आसिफ सन्नी ने बताया कि बिहार के फंसे हुए श्रमिकों को प्रशासन की ओर से अनुमति दिला दी गई व मेडिकल जांच कराया गया बुधवार को खड़गपुर से गया की ओर जाने वाली ट्रेन से कुछ श्रमिक लौटेंगे।

श्रमिक कार्तिक कुमार ने बताया कि 26 लोग आज रवाना हो रहे हैं व दो हजार 200 रु प्रति श्रमिक का खर्च आ रहा है उनलोगों ने बस का किराया जुगाड़ कर चुका दिया है उन्होने बताया कि सीटू के और से कुछ खाने के सामान मिले हैं व घर वापसी के लिए कहीं से कुछ मदद नहीं मिली। उन्होने बताया कि कुल तीन कमरा लेकर वे लोग बुलबुलचटी में रह रहे थे लेकिन लाकडाउन के कारण मकान मालिक सिर्फ उनलोगों से बिजली का बिल लिया जबकि किराया माफ कर दिया। कार्तिक ने बताया कि एक कमरा में सामान रख जा रहे हैं अगर स्थिति सामान्य हुई तो साबुन, तेल के फेरी का काम करने वे लोग पुनः आएंगे। इधर सीटू नेता अनिल दास श्रमिकों को  रवाना होने के समय पानी बोतल, भूजा चिवड़ा का पैकेट व बिस्कुट पैकेट दिए। ये सभी लोग जमुई जिला के सिकंदरा जिला में बस से उतर कर अपने अपने जिला की ओऱ रवाना होंगे। सीटू नेता अनिल दास का आरोप है कि शासक दल व प्रशासन श्रमिकों के प्रति उदासीन रवैया अपनाया जो अनापेक्षित है।ज्ञात हो कि लाकडाउन के दौरान प्रशासन की ओऱ से इन लोगों को खाद्य सामग्री दी गई थी पर ये लोग राहत सामग्री को नाकाफी बता जल्द गांव वापस जाना चाहते थे।

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