रेलवे कालोनी बस्ती बचाओ कमेटि का डीआरएम कार्यालय के समक्ष धरना स्थगित, बारिश के बावजूद भीड़ जुटा मुनमुन ने दिखाई ताकत, पर पदशक्ति के आगे हुआ नतमस्तक, किया कार्यक्रम स्थगित करने का एलान, कहा जल्द बड़े पैमाने पर होगा अतिक्रमण विरोधी आंदोलन

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रघुनाथ प्रसाद साहू

खड़गपुर। रेलवे कालोनी बस्ती बचाओ कमेटि का डीआरएम कार्यालय के समक्ष धरना बुधवार को स्थगित कर दिया गया हांलाकि बारिश के बावजूद भीड़ जुटा मुनमुन ने जहां अपने ताकत का प्रदर्शित किया वहीं पदशक्ति के आगे  नतमस्तक होते हुए कार्यक्रम स्थगित करने का एलान करते हुए कहा कि जल्द बड़े पैमाने पर होगा अतिक्रमण विरोधी आंदोलन। ज्ञात हो कि बीते दिनों मुनमुन व रबिशंकर पांडे की जोड़ी ने रेल कालोनी बस्ती बचाओ कमेटि गठित कर डीआरएम कार्यालय के समक्ष धरना देने की घोषणा पत्रकार सम्मेलन में किया प्रदीप व जौहर ने कमेटि व आंदोलन को मानने से साफ इंकार कर दिया जिसमें जिलाध्यक्ष अजित माईति ने भी मुहर लगा दी। प्रदीप का कहना था कि इस तरह के संगठन से पार्टी कमजोर होगा जबकि जौहर ने संगठन व आंदोलन को पार्टी का कार्यक्रम मानने से इंकार करते हुए आंदोलन में शरीक होने से इंकार कर दिया था प्रदीप व जौहर को भी जिलाध्यक्ष अजित माईति का साथ मिल गया था व नेताओं के बयान से गुटबाजी साफ झलक रही थी।

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उक्त नेताओं के विरोध के स्वर होते ही मुनमुन समर्थक आशीश सेनगुप्ता सक्रिय हो गए थे आशीष का कहना था कि प्रदीप व जौहर सहित जिलाध्यक्ष से बात करने की कोशिश जारी है व गैर भाजपा दलों का भी साथ लिया जाएगा पर लगता है मुनमुन- रबि समर्थक नेता जिला नेतृत्व को समझा नहीं सके जाहिर है कि जिलाध्यक्ष ने कार्यक्रम को समर्थन देने से मना कर दिया था लेकिन शायद मुनमुन लड़ाई मैदान में लड़ना चाहते थे इसलिए बारिश के बावजूद हजारों समर्थक जुटा डीआरएम कार्यालय के समक्ष घोषणा की कि जिलाध्यक्ष अजित माईति के निर्देश को मानते हुए आज का कार्यक्रम स्थगित कर रहे हैं पर उसने साथ ही जोड़ा कि रेल प्रशासन की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी व अतिक्रमण विरोधी अभियान हुआ तो वे इसका जमकर विरोध करेंगे।

इधर रबि पांडे का कमेटि घोषणा के वक्त उपस्थिति के बावजूद आज कार्यक्म में नहीं आना चर्चा का विषय बना रहा हांलाकि रबि का कहना है कि कार्यक्रम रद्द होना था इसलिए वह नहीं पुहंचे। अब देखना है कि मुनमुन- रबि की जोड़ी आने वाले दिनों में टीएमसी की राजनीति को किसी करवट मोड़ पाती है या प्रदीप शहर की राजनीति में अपना पैर और ज्यादा पसार पाते हैं। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि बैनर कांड हो या डीआरएम कार्यालय के समक्ष धरना मुनमुन विरोधी  अपनी बात मनवाने दिखते हैं पर राजनीति में अंतिम निर्णय तो जनता ही करती है अब देखना है कि जनसमर्थन किस करवट बैठती है।   

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