





मालदा जिले में हाल ही में हुई घटना ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया। यह घटना विशेष रूप से मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान नाम हटाए जाने के विरोध से जुड़ी है।




बुधवार को मालदा के कालियाचक क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। उनका आरोप था कि मतदाता सूची से हजारों लोगों के नाम बिना उचित कारण हटा दिए गए हैं। इसको लेकर लोगों में भारी नाराजगी थी और विरोध धीरे-धीरे उग्र रूप लेता गया। दोपहर से ही विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो गया, जिसमें सड़क जाम और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी शामिल थी।

इसी बीच कालियाचक ब्लॉक कार्यालय में ड्यूटी पर मौजूद सात न्यायिक अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। इन अधिकारियों में तीन महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि पहले उनके नाम मतदाता सूची में वापस जोड़े जाएं, तभी अधिकारियों को जाने दिया जाएगा। यह स्थिति करीब 8–9 घंटे तक बनी रही, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
हालत बिगड़ने पर मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों और उच्च न्यायालय तक पहुंचाई गई। इसके बाद देर रात पुलिस और केंद्रीय बलों को मौके पर भेजा गया। काफी मशक्कत के बाद रात में न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जब पुलिस इन अधिकारियों को लेकर जा रही थी, तब भी प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोकने की कोशिश की। सड़कों पर बांस और अवरोध डालकर काफिले को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा पुलिस के वाहनों पर पथराव किया गया, जिससे कई गाड़ियों के शीशे टूट गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया है और राज्य के पुलिस महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वहीं, इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है, जहां अलग-अलग दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
कुल मिलाकर, मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर शुरू हुआ विरोध इतना बढ़ गया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा तक खतरे में पड़ गई। यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों बेहद जरूरी हैं।






