





POCSO मामले में 74 वर्षीय वृद्ध को 20 वर्ष की सश्रम सजा। पता चला कि चद्रकोना बीट हाउस इलाके में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला हुआ था। उक्त मामले में मेदिनीपुर जिला अदालत के सेकंड सेशन कोर्ट के जज आशुतोष सरकार ने शेख रबियाल को सजा सुनाई।


स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सूर्यकांत पालुई ने बताया कि 2024 में बकरी चराने गई नाबालिग को बकरी चराने गए वृद्ध ने दुष्कर्म किया था। इसके बाद पीड़िता ने घटना के बारे में बताइ तो गढ़बेत्ता थाना में शिकायत दर्ज किया गया था। रूबियाल ने शारीरिक क्षमता जांच से इनकार किया था।

दोषी रुबियाल का कहना है कि वह बेगुनाह है। पुरानी दुश्मनी की वजह से उसे इस मामले में फंसाया गया है। उसके दो बेटे हैं जो पोलियो से पीड़ित हैं। वह दूसरों की मदद से उनका इलाज का खर्च उठा रहा था। उसने दया और नरमी की गुहार लगाई। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सूर्यकांत पालुई का कहना था कि उसे कानून के तहत सबसे कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए। बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि दोषी लगभग 74 साल का है। यह कोई दुर्लभ मामला नहीं है। ऐसी कोई परिस्थिति नहीं थी कि उसे कड़ी सज़ा दी जाए।
दोषी, राबियाल शेख को POCSO एक्ट, 2012 की धारा 4(2) और BNS, 2023 की धारा 65(1) के तहत सज़ा-योग्य अपराध के लिए बीस साल की कठोर कैद और 25,000 रुपये (पच्चीस हज़ार रुपये) का जुर्माना भरने की सज़ा दी गई जुर्माना न भरने पर उसे तीन महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। उसे BNS, 2023 की धारा 351(3) के तहत सज़ा-योग्य अपराध के लिए सात साल की कठोर कैद की सज़ा भी दी गई दोनों सज़ाएँ एक साथ चलेंगी। पीड़ित को ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का मुआवज़ा दिया जाएगा। . ₹25,000 (पच्चीस हज़ार रुपये) का जुर्माना, यदि जमा किया जाता है, तो पीड़ित को दिया जाएगा।







