“जिंदगी तैरना सिखाएगी…. डूब जाना किसी की आंखों में”

March 31, 2025 11:31 AM

✍️ रघुनाथ प्रसाद साहू/9434243363

“जिंदगी तैरना सिखाएगी….
डूब जाना किसी की आंखों में”                                           यह नसीहत कवि आयुष ‘चराग़’ ने आईआईटी खड़गपुर के कालिदास ऑडिटोरियम में जब दी तो उपस्थित श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से दाद दी। मौका था प्रौद्योगिकी साहित्यिक समूह (TLS), IIT खड़गपुर, की ओर से आयोजित “काव्यांजलि” । जिसमें हिंदी कविता, ग़ज़ल और गीतों की मधुर प्रस्तुतियों से रचनाकारोंं ने लोगों का मन मोहा।

फर्रुखाबाद से पधारे कवि वाशु पाण्डेय की रचनाओं की एक छोटी-सी झलक।

उम्र भर यूं ही जलते रहे ,
रौशनी भी नहीं कर सके ।
गांव करना था रौशन हमें ,
इक गली भी नही कर सके ।

 

“अपना पूरा ज़ोर लगा कर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
नफ़रत की दीवार गिराकर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद
इश्क़ के मुनकिर पूछ रहे हैं पहले गर्दन देगा कौन
अब तो दोनों हाथ उठाकर बोल मोहब्बत ज़िन्दाबाद”

भोपाल स आए  कवि केतन ने पढ़ा
“नज़ाकत से , शराफत से , मोहब्बत से, सलीके से ,
तुम्हे हम छूँ के गुज़रेंगे,मगर अपने तरीके से ।”

अक्षत डिमरी ने पढ़ा
“तुम बहुत होशियार हो तुमसे
शायरी वायरी नहीं होगी।
इक सुखनवर का काम है ऐसा
जिसमें कुछ सैलरी नहीं होगी।”

स्वाति श्रेया दुबे ने पढ़ा
“ये शहर है पराया हमारे लिए
बागबां में यहां गुल महकते नहीं।
इसलिए भी मैं ख़ामोश हूं इन दिनों
खानदानी किसी से उलझते नहीं।”

ईशान जिंदल ने पढ़ा
“हुश्न पर हिजाब हो गये
अश्क तबसे आब हो गये
आई लव यू कह दिया तो फिर
आश्ना खराब हो गये।”

गौरी ने पढ़ा
“तुम्हारी चाहत चेहरे पर लिए
घूमती हूं अब।
सीने से लगो और बताओ क्या कमी है।”

प्रणय ने पढ़ा
“ये महफ़िल कुछ नहीं है सब यहां अय्यार बैठे हैं।
तेरे ज़ख्मों पे हंसने को सभी तैयार बैठे हैं।”

युवा कवयित्री महक शर्मा की चंद लाइनें

बहुत बेरुखी से

कोई मेरी आँखों की मस्ती चुरा कर के
गुम हो गया है ।

है अब किसको फुरसत

जो मेरी गमगीन आँखों की सागर में डूबे
और कुछ भी न पाए ।

कार्यक्रम का सफल संचालन युवा कवि अक्षत डिमरी ने किया। कार्यक्रम में डाॅ राजीव कुमार रावत, प्रो एच एन मिश्र, प्रो संजीव श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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