बजट 2026: मध्यम वर्ग को बड़ी राहत, ₹12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं; इन्फ्रास्ट्रक्चर और रेलवे के लिए खुले खजाने
1 फरवरी, 2026 केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में मोदी सरकार का एक और ऐतिहासिक बजट पेश किया। ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए इस बजट में मध्यम वर्ग, रेलवे और आधुनिक तकनीक पर विशेष ध्यान दिया गया है।
आयकर में बड़ी छूट: मध्यम वर्ग की बल्ले-बल्ले
बजट 2026 की सबसे बड़ी घोषणा इनकम टैक्स को लेकर रही। नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत अब ₹12 लाख तक की वार्षिक आय वाले व्यक्तियों को कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसके अलावा, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर ₹75,000 पर बरकरार रखा गया है, जिससे प्रभावी टैक्स छूट सीमा ₹12.75 लाख तक पहुँच जाती है।
रेलवे और इन्फ्रास्ट्रक्चर: 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर
भारतीय रेलवे के लिए वित्त मंत्री ने रिकॉर्ड आवंटन किया है। सरकार ने 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है, जिसमें दिल्ली-वाराणसी मार्ग प्रमुख है। इसके साथ ही, देश में परिवहन और लॉजिस्टिक्स को सस्ता बनाने के लिए अगले 5 वर्षों में 20 नए जलमार्ग (Waterways) शुरू किए जाएंगे।
सेमीकंडक्टर और ‘बायो-फार्मा शक्ति’ मिशन
भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान किया गया है, जिसके लिए ₹40,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए ‘बायो-फार्मा शक्ति’ योजना शुरू की गई है, जिसके तहत 3 नए संस्थान और जिला अस्पतालों में आपातकालीन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
MSME और युवाओं के लिए सौगात
छोटे उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ का नया फंड बनाया गया है। युवाओं के लिए ‘शिक्षा से रोजगार’ समिति का गठन किया गया है, जो सीधे कौशल विकास और नौकरी दिलाने पर काम करेगी।
बजट की 5 मुख्य बातें:
टैक्स फ्री आय: ₹12 लाख तक की सालाना कमाई पर अब जीरो टैक्स।
सेमीकंडक्टर: ₹40,000 करोड़ के निवेश के साथ भारत बनेगा ग्लोबल चिप मेकर।
बुजुर्गों को राहत: वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स कटौती की सीमा बढ़ाकर ₹1 लाख की गई।
जलमार्ग विकास: ओडिशा से शुरू होंगे नए वॉटरवे प्रोजेक्ट्स।
डिजिटल इंडिया: रेहड़ी-पटरी वालों के लिए ₹30,000 की सीमा वाला UPI-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड।
वित्त मंत्री का संदेश: “यह बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के कर्तव्यों और सपनों का प्रतिबिंब है।”