उत्तर प्रदेश की लापता किशोरी पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर स्टेशन पर झुलसी हालत में मिली, आरपीएफ ने बचाई जान
पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह मानवता की एक मिसाल देखने को मिली। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से लापता एक 15 वर्षीय किशोरी अत्यंत दयनीय और घायल अवस्था में स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर घूमती हुई पाई गई। किशोरी का चेहरा और शरीर के कई हिस्से गंभीर रूप से जले हुए थे, जिसके कारण यात्री उससे दूर भाग रहे थे।
आरपीएफ कर्मी की तत्परता:
ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ कर्मी दीपक घोष की नजर जब इस बेसहारा लड़की पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत कदम उठाया। उन्होंने देखा कि लड़की दर्द से कराह रही थी और उसके घावों से दुर्गंध आ रही थी। दीपक घोष ने अपने सहकर्मियों की मदद से उसे सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया और मानवीय आधार पर उसकी सहायता की।
अस्पताल में शुरुआती आनाकानी:
आरपीएफ कर्मी घायल किशोरी को तुरंत मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज ले गए। बताया जा रहा है कि शुरुआत में पहचान पत्र न होने के कारण डॉक्टरों ने इलाज करने में हिचकिचाहट दिखाई, लेकिन दीपक घोष के कड़े प्रयास और हस्तक्षेप के बाद किशोरी का प्राथमिक उपचार शुरू किया गया।
घर में प्रताड़ना का संदेह:
किशोरी की पहचान उत्तर प्रदेश के जौनपुर निवासी आरती बिन के रूप में हुई है। उसने बहुत मुश्किल से बताया कि वह अपने घर में हो रहे अत्याचार और प्रताड़ना से तंग आकर भाग आई है। हालांकि, वह यह नहीं बता सकी कि वह बंगाल कैसे पहुँची और उसे ये जलने के निशान कैसे आए। डॉक्टरों के अनुसार, उसके शरीर पर जख्म करीब एक महीने पुराने हैं, जो संक्रमण का रूप ले चुके थे।
आरपीएफ कर्मी की बेटी ने की मदद:
अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद, दीपक घोष उसे आरपीएफ पोस्ट ले आए। उन्होंने अपनी बेटी को बुलाकर किशोरी को नहलाया, उसके घाव साफ करवाए और उसे नए कपड़े पहनाए। इस नेक पहल की स्थानीय लोगों और चाइल्ड हेल्पलाइन के अधिकारियों ने जमकर सराहना की है।
सरकारी होम में मिली शरण:
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के माध्यम से किशोरी को फिलहाल रांगामाटी स्थित सरकारी होम ‘विद्यासागर बालिका भवन’ में रखा गया है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी संदीप दास ने बताया कि सोमवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे होम में रखने की व्यवस्था की जाएगी और बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है कि किशोरी के साथ यूपी में क्या हुआ था और वह किन परिस्थितियों में बंगाल पहुँची।