सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी: ‘लोकतंत्र बचाओ’ की गुहार और मतदाता सूची पर छिड़ी कानूनी जंग
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। 4 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं। उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा राज्य में की जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया को चुनौती दी है।
मुख्य विवाद: 58 लाख नाम हटाने का आरोप
ममता बनर्जी ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने दलील दी कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका आरोप है कि इस विशेष अभियान के नाम पर राज्य के लाखों वैध मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं।
याचिका की मुख्य बातें:
सामूहिक विलोपन: टीएमसी का दावा है कि लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या उन्हें हटाने के लिए चिन्हित किया गया है।
आधार कार्ड को मान्यता: मुख्यमंत्री ने मांग की है कि पहचान के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड को पर्याप्त माना जाए और मतदाताओं को 2002 के पुराने रिकॉर्ड दिखाने के लिए मजबूर न किया जाए।
2025 की सूची का आधार: याचिका में मांग की गई है कि 2026 का विधानसभा चुनाव 2025 की मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर ही कराया जाए।
अल्पसंख्यकों और प्रवासियों को निशाना: ममता बनर्जी ने अदालत में कहा कि यह प्रक्रिया विशेष रूप से महिलाओं, प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यक समुदायों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश है।
कोर्ट रूम का माहौल: “न्याय रो रहा है”
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने भावुक होते हुए कहा, “माई लॉर्ड, लोकतंत्र को बचाइए। केवल पश्चिम बंगाल को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? जो प्रक्रिया दो साल में पूरी होनी चाहिए, उसे तीन महीने में खत्म करने की जल्दबाजी क्यों है?”
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और निर्देश:
| कोर्ट का आदेश | विवरण |
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| नोटिस जारी | अदालत ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। |
| संवेदनशीलता की सलाह | CJI सूर्यकांत ने चुनाव आयोग से कहा कि उनके अधिकारियों को मतदाताओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। |
| पारदर्शिता | कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, उनकी सूची ग्राम पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित की जाए। |
| अगली सुनवाई | मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को तय की गई है। |
विपक्ष का पलटवार: “स्क्रिप्टेड ड्रामा”
दूसरी ओर, भाजपा और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की इस पेशी को एक “स्क्रिप्टेड ड्रामा” करार दिया है। भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री फर्जी मतदाताओं और घुसपैठियों को बचाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बना रही हैं। भाजपा का दावा है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण निष्पक्ष चुनाव के लिए अनिवार्य है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किसी भी वास्तविक नागरिक का नाम गलती से न कटे। 9 फरवरी की सुनवाई यह तय करेगी कि क्या बंगाल चुनाव पुरानी सूची पर होंगे या संशोधित सूची पर।