





केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के परिवार के व्यावसायिक साम्राज्य और एक बीफ निर्यात कंपनी के बीच कथित संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना दलित यूट्यूबर और इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन के लिए भारी पड़ गया है। उन पर 50 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस के साथ-साथ नागपुर साइबर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई है।



विवाद की जड़: ‘द कारवां’ की खोजी रिपोर्ट:

इस पूरे विवाद का आधार ‘द कारवां’ मैग्जीन में प्रकाशित एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नितिन गडकरी के बेटे निखिल गडकरी के नेतृत्व वाली कंपनी ‘सियान एग्रो इंडस्ट्रीज’ (CIAN Agro Industries) के ‘रेम्बल एग्रो एंड फूड्स’ (वर्तमान में विनाद फूड्स) नामक बीफ निर्यातक फर्म के साथ गहरे व्यापारिक और वित्तीय संबंध हैं।
रिपोर्ट के मुख्य आरोप:
निदेशकों का संबंध: आरोप है कि सियान एग्रो और रेम्बल एग्रो के बीच शेयरधारकों और निदेशकों की अदला-बदली हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, नितिन गडकरी के दूसरे बेटे सारंग गडकरी भी एक समय रेम्बल एग्रो के निदेशक थे।
वित्तीय सहायता: रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि नितिन गडकरी की पत्नी कंचन गडकरी की अध्यक्षता वाले एक सहकारी बैंक से इस बीफ निर्यातक कंपनी को बड़ा ऋण (Loan) दिया गया है।
2022 का लोनावला मांस जब्ती मामला:-
इस विवाद में 2022 की एक घटना का भी जिक्र है, जब पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लोनावला के पास पुलिस ने लगभग 28 टन मांस से भरा एक ट्रक पकड़ा था। रेम्बल एग्रो ने उस मांस पर अपना दावा किया था, लेकिन अदालत ने दस्तावेजों में कई विसंगतियां पाई थीं। कोर्ट के अनुसार, मांस हैदराबाद का था लेकिन उसका स्वास्थ्य प्रमाण पत्र उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से जारी किया गया था।
मुकेश मोहन पर कानूनी कार्रवाई:-
यूट्यूबर मुकेश मोहन ने ‘द कारवां’ की इसी रिपोर्ट का विश्लेषण करते हुए एक वीडियो साझा किया था। इसके बाद उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू की गई:
•50 करोड़ का नोटिस: सियान एग्रो ने आरोप लगाया है कि इस वीडियो से उनकी बाजार प्रतिष्ठा और ब्रांड वैल्यू को नुकसान पहुंचा है, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा गया है।
•BNS की धाराओं में मामला: नागपुर साइबर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356(3) और 3(5) के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है।
•पारिवारिक दबाव: मुकेश मोहन का आरोप है कि पुलिस ने उनके चचेरे भाई घनश्याम डोलिया से भी इस मामले में पूछताछ की है क्योंकि उनका नाम यूट्यूब खाते से जुड़ा था।
अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक बहस:-
बीजेपी और आरएसएस वैचारिक रूप से ‘गौ-रक्षा’ के समर्थक रहे हैं, ऐसे में केंद्रीय मंत्री के परिवार का नाम बीफ व्यवसाय से जुड़ना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। दूसरी ओर, मुकेश मोहन ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों (जैसे इथेनॉल मिश्रण) की आलोचना करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
नितिन गडकरी पहले भी अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा कर चुके हैं। अब यह देखना होगा कि डिजिटल मीडिया और बड़े कॉर्पोरेट हितों के बीच यह कानूनी लड़ाई क्या मोड़ लेती है।










